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साइबर हमला: उत्तराखंड पुलिस की ऑनलाइन एफआईआर सेवा ठप, स्वास्थ्य प्राधिकरण के डेटा में भी लगी सेंध – myuttarakhandnews.com

देहरादून; उत्तराखंड पुलिस की ऑनलाइन एफआईआर सुविधा पिछले करीब 15 दिन से ठप है। गूगल के माध्यम से सीसीटीएनएस उत्तराखंड के लिंक पर जाने वाले निराश हैं तो सीधे policecitizenportal.uk.gov.in तो खुल रहा है लेकिन यहां भी दर्ज एफआईआर नहीं देख सकते। उधर, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के डेटा में 21 अगस्त की रात 10:30 बजे सेंध लग गई। किसने लगाई किसी को पता नहीं।
उत्तराखंड पुलिस वेबसाइट और एप के माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने, दर्ज एफआईआर देखने समेत कई सुविधाएं देती है। इस वेबसाइट को सीसीटीएनएस उत्तराखंड के नाम से गूगल सर्च भी कर सकते हैं। लेकिन जब सर्च करेंगे तो आने वाले policecitizenportal.uk.gov.in/Citi/firSearch.aspx लिंक नहीं खुल रहा है।
सर्वर एरर आ रहा है। जब हमने इसकी पड़ताल की तो सूत्रों से पता चला कि यह साइबर हमले का शिकार है। हमले की वजह से सर्वर को नुकसान हुआ है, जिस कारण ये सेवाएं बंद हैं। इसके विकल्प के तौर पर एक लिंक तो चलाया गया है लेकिन उस पर भी स्पष्ट लिखा है कि व्यू एफआईआर की सेवाएं तकनीकी दिक्कतों के कारण बंद हैं। आपको बता दें कि 2023 में भी सीसीटीएनएस पर साइबर हमला हो चुका है। आईटीडीए के अफसर इसके बारे में कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।
आयुष्मान योजना, गोल्डन कार्ड की सुविधा उपलब्ध करा रहे राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण का लाखों कर्मचारियों, आम जनता का डेटा खतरे में है। सूत्रों के मुताबिक, 21 अगस्त की रात 10:30 बजे किसी ने प्राधिकरण का क्रेडेंशियल यानी आईडी-पासवर्ड का डेटा कॉपी कर लिया है। खास बात ये भी है कि डेटा कॉपी होने का अलर्ट भी आ चुका है। आईटीडीए ने इस संबंध में प्राधिकरण के अफसरों से जवाब मांगा है। हालांकि प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि जिस समय डेटा कॉपी की बात कही जा रही है, उस समय ऑफिस बंद होता है। फिर भी इसकी जांच की जा रही है कि कोई उस दौरान अंदर तो नहीं घुसा। आशंका जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों ने डेटा कॉपी किया है। प्राधिकरण के अपर निदेशक आईटी अमित शर्मा ने बताया कि आईटीडीए ने इस संबंध में जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि उस समय कार्यालय बंद रहता है।
अभी तक जो लिंक था, उसका दुरुपयोग हो रहा था। ठग एफआईआर की कॉपी सीधे निकालकर अपराध को अंजाम दे रहे थे। उसे हमने प्रतिबंधित किया है। पीड़ित पक्ष लॉगिन करके सीधे एफआईआर देख सकते हैं। -डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी, सीसीटीएनएस/एसटीएफ

Nandni sharma

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