देहरादून: chardham yatra suspend: उत्तराखंड में मॉनसून का कहर जारी है। भारी बारिश और यात्रा मार्गों पर कई जगह भूस्खलन होने के कारण मंगलवार को चारधाम यात्रा को दो दिन के लिए स्थगित कर दिया गया । अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बदरीनाथ नेशनल हाईवे कंचन गंगा में पहाड़ी से मालवा आने के कारण बंद हो गया है। गंगा नदी खतरे के निशान के करीब बह रही है। देहरादून में नवनिर्मित पुल ढह गया है। मसूरी रोड भूस्खलन के कारण बंद हो गई है।
गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन से अवरूद्ध होने तथा भारी वर्षा के अलर्ट के कारण यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत आज और कल के लिए चारधाम यात्रा स्थगित की गई है। बदरीनाथ से लगभग 4 किलोमीटर पहले स्थित कंचनगंगा पर भूस्खलन हुआ है।
रुद्रप्रयाग। मंदाकिनी नदी के पार गई तीन महिलाएं अचानक नदी के जलस्तर बढ़ने से फंस गएष सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र, रुद्रप्रयाग द्वारा तत्काल आवश्यक कार्यवाही करते हुए रेस्क्यू टीमों को मौके पर भेजा गया इसके बाद रेस्क्यू करते हुए तीनों महिलाओं को सुरक्षित निकाल लिया गया।
जानकारी के अनुसार मंगलवार स्थानीय निवासी सुजान सिंह द्वारा सूचना दी गई कि तीन महिलाएँ तिलवाड़ा-सुमाड़ी पुल के नीचे लकड़ी एकत्र करने गई थीं। अचानक नदी का जलस्तर बढ़ जाने के कारण तीनों महिलाएँ बीच में फँस गई हैं। सूचना प्राप्त होते ही जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र, रुद्रप्रयाग द्वारा तत्काल एसडीआरएफ, डीडीआरएफ एवं जल पुलिस की रेस्क्यू टीमों को घटनास्थल पर पंहुची। गणित रेस्क्यू करते हुए तीनों महिलाओं को सुरक्षित वापस लाया गया।
खतरे के निशान के करीब गंगाहरिद्वार। भीमगोड़ा बैराज पर सुबह 11 बजे गंगा का जलस्तर 292.70 मीटर दर्ज हुआ। चेतावनी निशान 293 मीटर से महज 0.30 मीटर नीचे गंगा बह रही है। गंगा का खतरे का निशान 294 मीटर पर है। ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के बाद जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इस सीजन में अब तक का सबसे अधिक गंगा जलस्तर रिकॉर्ड हुआ है। जलस्तर बढ़ने के बाद भीमगोड़ा बैराज पर जल निकासी के लिए अतिरिक्त गेट खोले गए। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बन रहा है।
दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर नया खतराविकासनगर। दिल्ली यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग 507 पर मोई झरने से आगे एक नया जजरेड बन गया है। इस स्थान पर जब भी बारिश होती है इस स्थान पर मलवा आने से मार्ग बंद हो जाता है। इस स्थान पर मलवा दलदल में बदल जाता है जिस कारण अक्सर यहां वाहन इसमें फंस जाते हैं। रात के समय स्थिति और खराब हो जाती है रात के समय मलवा हटाने के लिए मशीन लगाने में दिक्कत होती है ऊपर से पत्थरों का आने का खतरा हमेशा बना रहता है जिस कारण मार्ग खोलने में परेशानी होती है।
विभाग की ओर से दो-दो मशीन लगाने के बावजूद भी बारिश होने पर दिन में दो-तीन घंटे मार्ग बंद हो जाता है। इस मार्ग से होकर चकराता क्षेत्र मसूरी यमुना घाटी और यमुनोत्री को जाने वाले लोग सफर करते हैं। मार्ग बंद होने के कारण किसानो कि फसले सही समय पर मंडी को नहीं पहुंच पाती जिससे उनका आर्थिक नुकसान होता है कई बार मरीज मार्ग बंद होने पर रात के समय फस जाते हैं। इस संबंध में एनएच देहरादून के अधिशासी अभियंता सुरेश तोमर का कहना है कि मार्ग पर मलवा आने की स्थिति में दो जेसीबी मशीन हमेशा तैयार रहती है।
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