देहरादून: बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड परियोजना पर बढ़ता विरोध, पूर्व सैनिकों और समाजसेवियों ने गडकरी को लिखा पत्र – पर्वतजन

देहरादून, 19 दिसंबर 2025: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए धामी सरकार द्वारा प्रस्तावित बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड परियोजना का विरोध तेज हो गया है। कई सामाजिक संगठनों और लगभग 140 पूर्व सैनिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस परियोजना को शुरू न करने की अपील की है। विरोध करने वालों का मानना है कि यह योजना शहर के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन के संस्थापक एवं समाजसेवी अनूप नौटियाल के अनुसार, पत्र में मंत्री को अवगत कराया गया है कि देहरादून मेन बाउंड्री थ्रस्ट और हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट के बीच स्थित है, जिससे यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील है। पहले देहरादून को भूकंप जोन 4 में रखा गया था, जो अब उच्च जोन में वर्गीकृत है। क्षेत्र में समय-समय पर हुई रिसर्च से पता चलता है कि अतिक्रमण और अनियोजित विकास से यहां दबाव बढ़ा है, जिसका उदाहरण हाल की आपदाएं हैं।
नौटियाल ने कहा कि यदि यह परियोजना लागू हुई तो देहरादून के लिए यह घातक सिद्ध हो सकती है। इससे बिंदाल और रिस्पना नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होगा, साथ ही अन्य जोखिम भी बढ़ेंगे। पत्र में पर्यावरणीय प्रभावों पर भी जोर दिया गया है, जिसमें कहा गया कि इस निर्माण से शहर के छोटे जीव-जंतु और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों की उम्मीद है कि केंद्रीय मंत्री पत्र पर ध्यान देंगे और परियोजना को स्थगित कर दिया जाएगा। अनूप नौटियाल ने सुझाव दिया कि ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए एलिवेटेड रोड की बजाय ब्लू-ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाए, जिसमें नदियों के संरक्षण के साथ फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और हरियाली पर फोकस हो।
उन्होंने आगे कहा कि देहरादून अपनी सुहावनी जलवायु के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन निरंतर विकास कार्यों और परियोजनाओं से यहां की हवा और पर्यावरण प्रभावित हो चुके हैं। बता दें कि यह प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर से गुजरते हुए करीब 26 किलोमीटर लंबा होगा, जिसका उद्देश्य शहर को जाम मुक्त करना और मसूरी पहुंच को सरल बनाना है। हालांकि, बाढ़ का बढ़ता खतरा, विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान जैसे मुद्दों के कारण इसका व्यापक विरोध हो रहा है।
परियोजना को लेकर आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Sapna Rani

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