देहरादून: ‘शब्दावली’ के अंतिम दिन हिंदी साहित्य पर चर्चा, युवाओं से हिंदी को बढ़ावा देने का आह्वान

देहरादून: ‘शब्दावली’ के अंतिम दिन हिंदी साहित्य पर चर्चा, युवाओं से हिंदी को बढ़ावा देने का आह्वान

देहरादून। हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित ‘शब्दावली’ के अंतिम दिन साहित्यिक रचनाओं और हिंदी के महत्व पर गहन चर्चा की गई। इस तीन दिवसीय आयोजन का समापन साहित्य प्रेमियों, लेखकों, कवियों और अनुवादकों के बीच संवाद से हुआ, जहां युवाओं से हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी और वैली ऑफ वर्ड्स के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के अंतिम दिन लेखिका जोराम यालाम नाबाम की पुस्तक ‘गाय गाइका की औरतें’ पर चर्चा की गई। लेखिका ने पुस्तक के शीर्षक की गहराई और भावनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उनके साथ, लेखिका भारती शर्मा और कवयित्री ममता किरण ने भी अपनी विचार साझा किए।
‘राहुल सांकृत्यायन का साहित्य में योगदान’ विषय पर हुए दूसरे सत्र में वरिष्ठ कवि लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, अंजुम शर्मा और दिव्यांशु शर्मा ने राहुल सांकृत्यायन के जीवन और उनके यात्रा वृतांतों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा, साहित्य पर आधारित एक क्विज़ का आयोजन हुआ जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शाम के सत्र में वरिष्ठ कवि पद्मश्री लीला धर जगूड़ी ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। उनके साथ युवा कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर साहित्यिक रंग बिखेरा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित काव्य संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। टीम नटरंग के नृत्य, आइना थिएटर ग्रुप की नाट्य प्रस्तुति और टीम नंदाज़ के गीतों ने खूब तालियां बटोरी।

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