नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2022 के उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही सामग्री को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करना की पीठ ने निर्देश जारी किया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता दुष्यंत गौतम के नाम से जुड़ी ऐसी सामग्री को 24 घंटों के अंदर हटा दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं इस सामग्री को हटाने के लिए जिम्मेदार होंगे। साथ ही, यदि भविष्य में ऐसी सामग्री दोबारा पोस्ट की जाती है, तो प्लेटफॉर्म याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई की सुविधा प्रदान करेंगे।
सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि इस तरह के वीडियो और सामग्री के माध्यम से याचिकाकर्ता की छवि को जानबूझकर खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें विभिन्न राजनीतिक संगठनों के आधिकारिक खाते भी शामिल हैं। भाटिया ने जोर दिया कि अंकिता भंडारी प्रकरण में दुष्यंत गौतम का नाम कभी उजागर नहीं हुआ और निचली अदालत ने इस मामले में अपना निर्णय पहले ही दे दिया है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले पांच वर्षों से राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस विवादास्पद सामग्री के कारण उन्हें गंभीर प्रतिष्ठा हानि का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है।
दुष्यंत गौतम ने अपनी याचिका में मांग की थी कि अंकिता भंडारी मामले से उनके नाम को जोड़कर फैलाई जा रही सामग्री को तत्काल हटाया जाए। याचिका के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो साझा किया गया जो तेजी से फैल गया। इस वीडियो में गलत ढंग से एक कथा गढ़ी गई और दुष्यंत गौतम को उस घटना से जोड़कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी जांच एजेंसी ने उनका नाम नहीं लिया।
याचिका में आगे कहा गया कि इस प्रकरण से जुड़ा प्रचार अभियान असत्य सूचनाओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य राजनीतिक फायदे हासिल करना है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड पुलिस ने हाल ही में उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के विरुद्ध गलत प्रचार के आरोप में कई प्राथमिकियां दर्ज की हैं।
ज्ञात हो कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या हो गई थी। आरोप है कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता पर एक ग्राहक के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए जोर डाला था। पुलकित आर्य के पिता पूर्व बीजेपी नेता रह चुके हैं। अंकिता का शव एक नहर से प्राप्त हुआ था। निचली अदालत ने पुलकित आर्य सहित दो अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित जीवनसाथी उर्मिला सनावर ने दावा किया था कि अंकिता पर बीजेपी के एक प्रमुख नेता के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया। उनके वीडियो में कहा गया कि सुरेश राठौर को जानकारी मिली थी कि वह नेता दुष्यंत गौतम हैं। हालांकि, बाद में राठौर ने स्पष्ट किया कि वह वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनाया गया था, जिसका मकसद बीजेपी की छवि खराब करना था।
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