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उत्तराखंड में विकास को लगेंगे पंख! काशीपुर में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की बड़ी तैयारी, खुलेगा नौकरियों का पिटारा – myuttarakhandnews.com

गढ़वाल: रामनगर में आज उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पंतनगर से हेलीकॉप्टर के माध्यम से गढ़वाल कमिश्नर विनय कुमार पांडे सीधे रामनगर पहुंचे. जहां उन्होंने काशीपुर स्थित नेपा फार्म का स्थलीय निरीक्षण किया. गढ़वाल कमिश्नर ने बताया कि नेपा फार्म और उसके आसपास का क्षेत्र औद्योगिक विकास की दृष्टि से बेहद संभावनाशील है. इससे पहले गढ़वाल कमिश्नर ने पंतनगर स्थित पराग फार्म और खुरपिया क्षेत्र का भी निरीक्षण किया.
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों संग चर्चाआपको बता दें, केंद्र सरकार ने खुरपिया क्षेत्र को अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत इंडस्ट्रियल एस्टेट के रूप में घोषित किया है और यहां विकास कार्यों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. खुरपिया साइट पर उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई है. इसके बाद रामनगर से कुछ दूरी पर स्थित नेपा फार्म का भी निरीक्षण किया जा रहा है. ताकि यह मूल्यांकन किया जा सके कि उपलब्ध भूमि का सबसे बेहतर उपयोग कैसे किया जाए.
रोजगार की नई संभावनाएंगढ़वाल कमिश्नर ने बताया कि यह दौरा सिर्फ निरीक्षण भर नहीं है, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं का रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट जमीनी हकीकत पर आधारित होगी. उन्होंने बताया कि नेपा फार्म क्षेत्र में फिलहाल 3-4 संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. इनमें पावर प्लांट, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, या अन्य बड़े स्तर के विकास कार्य शामिल हो सकते हैं.
औद्योगिक नक्शे पर एक अहम केंद्रउन्होंने कहा कि किसी भी विकल्प पर अंतिम निर्णय स्थल निरीक्षण और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही लिया जाएगा. कमिश्नर पांडे ने यह भी कहा कि लगातार हो रहे स्थलीय निरीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों के लिए उपयुक्त माहौल तैयार किया जा सके और क्षेत्र के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलें. नेपा फार्म और खुरपिया क्षेत्र को विकसित किए जाने के बाद यह इलाका कुमाऊं मंडल के औद्योगिक नक्शे पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है.
इस पूरी प्रक्रिया के बाद तैयार विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर भविष्य की बड़ी औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का रास्ता तय होगा.

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