कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी ने की व्यापक समीक्षा

10 जुलाई तक स्थायी प्रकृति के सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश
नीलकंठ क्षेत्र में पेयजल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, विद्युत, यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर विभागों को सौंपे दायित्व
पौड़ी। आगामी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से जनपद मुख्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नीलकंठ महादेव मंदिर क्षेत्र, यात्रा मार्गों, पार्किंग स्थलों तथा विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि 10 जुलाई तक यात्रा से संबंधित स्थायी प्रकृति के सभी आवश्यक कार्य पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें।
बैठक में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने नीलकंठ क्षेत्र में जिला योजना के अंतर्गत संचालित विकास एवं आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए वहां मजबूत पुश्ता निर्माण, पुलिया की मरम्मत तथा मंदिर परिसर के ऊपरी हिस्से में स्थायी व्यू-कटर स्थापित करने के लिए लोक निर्माण विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही गरुड़चट्टी से पीपलकोटी मोटर मार्ग पर चल रहे बीएम कार्य, इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने एवं अन्य मरम्मत कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए सभी संबंधित विभागों को 10 जुलाई तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि कांवड़ यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके अतिरिक्त उन्होंने नगर पंचायत जोंक को सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार हेतु शौचालय खरीदने के लिए 5.50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत करते हुए मोबाइल टॉयलेटों की त्वरित स्थापना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
जिलाधिकारी ने कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उपजिलाधिकारी को यात्रा मार्गों पर व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मोटर मार्गों एवं पैदल मार्गों का स्पष्ट चिन्हीकरण, आवश्यक स्थानों पर बैरिकेडिंग, दिशा सूचक साइन बोर्ड, सुरक्षा संकेतक तथा अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते पूर्ण करने पर जोर दिया। स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने नीलकंठ क्षेत्र में लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का कार्य 15 जुलाई तक पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि यात्रा अवधि में एकत्रित होने वाले कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की समुचित व्यवस्था उपलब्ध रहे। उन्होंने यात्रा के दौरान नियमित सफाई, कूड़ा संग्रहण एवं स्वच्छता की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। वहीं वन विभाग को नीलकंठ मार्ग पर पुश्ता निर्माण, क्षतिग्रस्त हिस्सों की पैच मरम्मत, संभावित खतरे वाली चट्टानों को हटाने तथा झाड़ी कटान जैसे कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत करते हुए सभी कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने को कहा, जिससे यात्रा मार्ग सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाया जा सके।
यात्रा के दौरान पेयजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने पुण्डरासू पंपिंग योजना से नियमित जलापूर्ति बनाए रखने को कहा। उन्होंने शौचालयों में पानी की उपलब्धता की निरंतर निगरानी के लिए जिला पंचायत एवं जल संस्थान के कनिष्ठ अभियंताओं को संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त वाटर एटीएम, पेयजल टंकियों तथा अन्य जलापूर्ति व्यवस्थाओं को समय से स्थापित एवं क्रियाशील रखने को कहा।
स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जिला पंचायत को पर्याप्त संख्या में कार्मिक एवं सुपरवाइजर तैनात करने, अधिक से अधिक कूड़ेदान स्थापित करने तथा नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विद्युत व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता विद्युत को अतिरिक्त ट्रांसफार्मर स्थापित करने, बैकअप व्यवस्था तैयार रखने तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने, संवेदनशील स्थलों की निगरानी बढ़ाने तथा पुलिस एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने को कहा।
स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने यात्रा मार्ग पर पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा राहत इकाइयों (एमआरपी) की स्थापना, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में बताया गया कि नीलकंठ एवं पुण्डरासू में 24 घंटे स्वास्थ्य शिविर संचालित रहेंगे, जबकि अन्य नौ चिन्हित स्थानों पर भी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
जिलाधिकारी ने बीन नदी एवं घासीराम क्षेत्र में सोलर लाइट स्थापित करने, पार्किंग स्थलों का समतलीकरण करने तथा वहां विद्युत, पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पार्किंग स्थलों और पैदल मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बैरिकेडिंग के साथ सोलर लाइट लगाने पर भी बल दिया। साथ ही नगर पंचायत जोंक क्षेत्र में नालियों की नियमित सफाई, जलभराव की रोकथाम तथा शौचालयों की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।
आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने क्विक रिस्पांस टीम को सक्रिय रखने, एम्स ऋषिकेश सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय बनाए रखने तथा आपात मार्गों को हर समय सुचारु रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अग्निशमन विभाग को सभी संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करने तथा मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को समन्वित एवं जिम्मेदार तरीके से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत एवं यातायात संबंधी सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारु रूप से उपलब्ध कराई जाएं, जिससे यात्रा का संचालन सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
बैठक में अपर जिलाधिकारी एफ.आर. चौहान, अपर पुलिस अधीक्षक मनोज ठाकुर, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिव मोहन शुक्ला, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पारुल गोयल, एएमए जिला पंचायत संजय खंडूरी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान कोटद्वार अभिषेक कुमार वर्मा, परियोजना अधिकारी उरेडा चंद्रप्रकाश उपाध्याय, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश काला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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