होम-स्टे योजना में 2 लाख रिश्वत मांगने का आरोप जिला पर्यटन विकास अधिकारी सस्पेंड – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी (DTDO) बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
उन पर होम-स्टे पंजीकरण और अनुदान से जुड़े मामलों में रिश्वत मांगने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
 
मामला उस समय चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर शिकायतों और वीडियो के वायरल होने के साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई। प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर पाए जाने पर विभाग ने जांच पूरी होने तक अधिकारी को निलंबित कर दिया।
2 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
ऋषिकेश निवासी मोहम्मद रईस ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत (संख्या: CMHL-062026-2-1057857) दर्ज कर आरोप लगाया है कि उनके ‘किंग क्वीन’ होम-स्टे के पंजीकरण के लिए जिला पर्यटन अधिकारी बृजेन्द्र पाण्डेय और विभाग के कर्मचारी फिरोज खान ने 2 लाख रुपये रिश्वत मांगी।
 
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद उनका पंजीकरण जानबूझकर लंबित रखा गया। इसके बाद कथित तौर पर अधिकारी ने कैलकुलेटर पर 2 लाख रुपये लिखकर रिश्वत की मांग की। रईस का दावा है कि दबाव में उन्होंने अलग-अलग किश्तों में 1.90 लाख रुपये दिए, जिसके बाद उन्हें पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
 
उन्होंने पूरे घटनाक्रम के वीडियो और ऑडियो साक्ष्य होने का भी दावा किया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
 
मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे जांच
प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. इस पूरे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नरेंद्र सिंह भंडारी को सौंपी गई है. जांच के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े सभी पहलुओं और दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस अनियमितता में और कौन-कौन शामिल है.
 
निलंबन के बाद क्या होगी स्थिति?
निलंबन की अवधि के दौरान, नियम के अनुसार, बृजेन्द्र पांडे को जीवन निर्वहन भत्ता और अर्ध औसत वेतन देय होगा। साथ ही, उन्हें उनके मूल पद से हटाकर पर्यटन विकास मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. निलंबन की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें मुख्यालय की अनुमति के बिना अपना कार्यस्थल छोड़ने की अनुमति नहीं होगी.
 
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
इस कार्रवाई ने पर्यटन विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी परेशानी के पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है. दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है, और इस तरह के भ्रष्टाचार से सरकारी योजनाओं की साख पर बुरा असर पड़ता है.

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