प्रदेश में दायित्वधारियों की नियुक्तियों का सिलसिला तेज़ हो गया है। हाल ही में दो अलग-अलग सूचियाँ जारी की गईं, जिनमें पहले 14 और फिर 7 नेताओं को विभिन्न निगमों, बोर्डों और समितियों में जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। इसके बावजूद, वन निगम अब भी अपने मुखिया के इंतज़ार में है।
वन निगम का अध्यक्ष पद करीब दो वर्षों से खाली पड़ा है। वर्ष 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष कैलास गहतोड़ी के निधन के बाद से यह जिम्मेदारी किसी को नहीं सौंपी जा सकी है। उम्मीद जताई जा रही थी कि नई दायित्वधारी सूची में इस पद पर भी नियुक्ति हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
सिर्फ अध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि वन विकास निगम का पूरा ढांचा ही अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। जीएम, आरएम और डीएलएम जैसे कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिन पर फिलहाल प्रभारी व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है।
इसी तरह कुमाऊं मंडल विकास निगम और गढ़वाल मंडल विकास निगम में भी अध्यक्ष पद खाली हैं। मंडियों की समितियों में भी अब तक अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। वहीं, बीस सूत्रीय कार्यक्रम में भी उपाध्यक्षों के पद खाली पड़े हैं।
इन परिस्थितियों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और संबंधित लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इन सभी पदों पर नियुक्तियाँ की जाएंगी और लंबित दायित्वों का बंटवारा पूरा होगा।
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