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भूकंप आए या फटे बादल… अब उत्तराखंड मे ‘आपदा सखी’ संभालेंगी मोर्चा, जानिए क्या है प्लान? – Uttarakhand

Earthquake or cloud burst… now ‘Aapada Sakhi’ will take charge in Uttarakhand, know what is the plan?इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)देहरादून : उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जो प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ आपदाओं की दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है. यहां हर साल कहीं न कहीं बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ या भूकंप जैसी घटनाएं लोगों की ज़िंदगी को झकझोरती हैं. इन आपदाओं में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होता है, जो पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं, खासकर महिलाएं और बच्चे. लेकिन अब उत्तराखंड में तस्वीर बदलने जा रही है. राज्य सरकार ने महिलाओं को ‘आपदा सखी’ के रूप में तैयार कर उन्हें आपदा प्रबंधन का मजबूत हथियार बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है.राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को अब आपदा के समय आगे की लाइन में खड़ा किया जा रहा है. इन महिलाओं को ‘आपदा सखी’ (Aapda Sakhi) की भूमिका में प्रशिक्षित किया जाएगा. इनका काम केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ये पूरे गांव के लिए आपदा के वक्त की नायिकाएं बनेंगी. इसके तहत राज्य के सभी 13 जिलों से कुल 1557 महिलाओं का चयन किया गया है, जिनकी सूची उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Uttarakhand disaster management) को भेज दी गई है. अब यूएसडीएमए इनके लिए ख़ास ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कर रहा है ताकि ये महिलाएं अपने-अपने जिलों में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभा सकें.पौड़ी से चुनी गई 243 महिलाएंइनमें से पौड़ी से सबसे ज्यादा 243 महिलाएं चुनी गई हैं, जबकि अल्मोड़ा से 165, टिहरी से 150 और चमोली से 144 महिलाएं इस सूची में शामिल हैं. देहरादून जिले से 105 और हरिद्वार से 96 आपदा सखी चुनी गई हैं. इसके अलावा, नैनीताल से 132, पिथौरागढ़ से 123, चंपावत से 81, बागेश्वर से 57, रुद्रप्रयाग से 51 चुनी गईं. राज्य में फिलहाल 67,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 5 लाख महिलाएं जुड़ी हैं. इन समूहों को 7413 ग्राम संगठन और 519 क्लस्टर संगठनों से मजबूत किया गया है. इन्हीं संगठनों से 3-3 महिलाओं का चयन कर उन्हें आपदा सखी बनाया गया है.राज्य के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि ने जानकारी दी कि जल्द ही ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे और आपदा सखी को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा, इसके साथ ही जिलाधिकारियों इनके लिए मानदेय की व्यवस्था भी करेंगे. यह पहल न केवल आपदा प्रबंधन को सामुदायिक स्तर पर मज़बूती देगी, बल्कि महिलाओं को नेतृत्व और फैसले लेने की भूमिका में लाकर सामाजिक बदलाव की भी आधारशिला रखेगी. उत्तराखंड की महिलाएं अब सिर्फ घर की चारदीवारी में सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि गांव की सुरक्षा की पहली दीवार बनेंगी.

Nandni sharma

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