
शुक्रवार को बाजार खुलते ही सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी में सुबह के कारोबार में 17 हजार रुपये से ज्यादा की कमजोरी देखने को मिली, जिससे इसका भाव करीब 3.82 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया। वहीं सोना भी दबाव में रहा और करीब 3 हजार रुपये की गिरावट के साथ प्रति 10 ग्राम 1.66 लाख रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा।
कारोबार के शुरुआती सत्र में दोनों कीमती धातुएं लाल निशान में रहीं। विश्लेषकों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों की तेज तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव बना। इसी उछाल के चलते हाल ही में सोना और चांदी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में थोड़ी स्थिरता भी नजर आई।
सुबह करीब 10 बजे चांदी 11,893 रुपये की कमजोरी के साथ 3,88,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। वहीं सोना 2,105 रुपये टूटकर 1,67,298 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल
वैश्विक बाजार में भी शुक्रवार को सोने की कीमतों में नरमी देखी गई। डॉलर में मजबूती के चलते सोने पर दबाव बना। इसके बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के माहौल में सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बनी रही। इसी वजह से जनवरी महीने में सोना मजबूत प्रदर्शन की ओर बढ़ता दिखा, जो 1980 के बाद का सबसे बड़ा मासिक उछाल हो सकता है।
स्पॉट गोल्ड 0124 GMT तक 0.9 प्रतिशत गिरकर 5,346.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे पहले यह 5,594.82 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका था। गिरावट के बावजूद जनवरी में सोने की कीमतों में 24 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है। यह लगातार छठा महीना है जब सोने में तेजी रही है और यह जनवरी 1980 के बाद की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी मानी जा रही है।
चांदी पर भी दिखा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई। स्पॉट सिल्वर 0.2 प्रतिशत फिसलकर 115.83 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इससे एक दिन पहले चांदी ने 121.64 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर बनाया था। जनवरी महीने में चांदी की कीमतों में 62 प्रतिशत की तेजी आई है, जो इसके अब तक के सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन की ओर इशारा करता है।
इस दौरान डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त देखने को मिली। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले से डॉलर को कुछ समर्थन मिला है। हालांकि इसके बावजूद डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट की दिशा में बना हुआ है।
