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60 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली, शूटरों की तलाश में कई राज्यों में दबिश – myuttarakhandnews.com

देहरादून। राजधानी देहरादून की राजपुर रोड स्थित पार्श्वनाथ मॉल में शुक्रवार सुबह झारखंड के गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में 60 घंटे बाद भी दून पुलिस के हाथ खाली हैं। हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस और एसटीएफ ने शूटरों की पहचान तो कर ली है, लेकिन आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।
पुलिस टीमें उत्तराखंड, यूपी, बिहार और झारखंड में लगातार दबिश दे रही हैं। घटना के बाद जमशेदपुर पुलिस ने पहले से तैयार गैंगस्टरों की फाइल के आधार पर उनके और उनके गुर्गों का भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। संदिग्ध गतिविधियों वाले अपराधियों से पूछताछ की जा रही है।
शातिर प्लानिंग से दिया वारदात को अंजाम
हत्या को अंजाम देने वाले शूटरों की पहचान आकाश प्रसाद, आशुतोष कुमार सिंह और विशाल के रूप में हुई है। इनका संबंध झारखंड के कुख्यात अपराधी राजा और विशाल सिंह से होने की आशंका जताई जा रही है।
जांच में सामने आया है कि 11 जनवरी को शूटर झारखंड से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और वहां से हरिद्वार आए। हरिद्वार से किराये पर दोपहिया वाहन लेकर वे देहरादून पहुंचे। हालांकि वारदात के समय उन्होंने दूसरी बाइक का इस्तेमाल किया। भागते वक्त इस्तेमाल की गई बाइक को पुलिस ने सहस्रधारा रोड क्षेत्र से बरामद कर लिया है, जिसे शूटरों ने फेंक दिया था।
यूपी-बिहार-झारखंड में छापेमारी
पुलिस की 10 से अधिक टीमें यूपी, बिहार और झारखंड में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। सीसीटीवी सर्विलांस से पता चला है कि हत्या के बाद शूटर हरिद्वार होते हुए यूपी की सीमा में दाखिल हुए। इसके बाद उनकी लोकेशन स्पष्ट नहीं हो पाई है।
संभावना जताई जा रही है कि आरोपी यूपी के रास्ते बिहार होते हुए झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में छिपे हो सकते हैं या फिर नेपाल सीमा पार कर चुके हों। जमशेदपुर पुलिस भी इन इनपुट्स पर काम कर रही है।
24-48 घंटे में इनाम घोषित करने की तैयारी
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ की टीमें दिन-रात आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। यदि अगले 24 से 48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं होती है, तो शूटरों पर नकद इनाम घोषित किया जाएगा। फिलहाल पुलिस तकनीकी सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
स्थानीय मिलीभगत की भी आशंका
पुलिस को आशंका है कि यह वारदात केवल बाहरी शूटरों का काम नहीं, बल्कि इसमें स्थानीय स्तर पर भी मदद मिली है। रविवार को पुलिस ने विक्रम शर्मा के भाई अरविंद शर्मा से घंटों पूछताछ की।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह गैंगवार और प्री-प्लांड मर्डर है। शूटरों को देहरादून में रुकने, रेकी करने और घटना के बाद सुरक्षित भागने के लिए स्थानीय सहयोग मिला। कई संदिग्ध पुलिस के रडार पर हैं और जल्द ही मामले का खुलासा होने की बात कही जा रही है।
संगठित गिरोह पर शक
प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि हत्याकांड को जमशेदपुर के एक संगठित गिरोह ने अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार राजा शर्मा, विशाल सिंह, आशुतोष सिंह और आकाश प्रसाद की भूमिका अहम मानी जा रही है।
पुलिस गैंगवार, आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई के एंगल से भी जांच कर रही है। विक्रम शर्मा का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके विरोधी सक्रिय बताए जाते हैं।
डिजिटल ट्रैकिंग पर फोकस
देहरादून पुलिस की विशेष टीम आरोपियों की डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है। सीडीआर, लोकेशन ट्रैकिंग और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। घटना के समय मॉल और आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों की सूची तैयार की गई है।
देहरादून और जमशेदपुर पुलिस के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है। तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आगे बढ़ चुकी है।

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