देहरादून, लोक गायिका पद्मश्री डॉ माधुरी बर्थवाल ने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम् केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है।
वह आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में भारतीय संविधान से प्रेरित चित्रों की प्रदर्शनी- सौहार्द के उद्घाटन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहीं थी। डॉ माधुरी ने कहा कि संविधान में अंकित चित्र और देश की लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति जब एक साथ आती हैं तो समाज में सौहार्द, संवेदनशीलता और एकता का संदेश प्रसारित होता है।
प्रभारी कुलपति डॉ तबस्सुम नकवी ने कहा कि संविधान से प्रेरित चित्र भारत की ऐतिहासिक यात्रा और राष्ट्रीय चेतना को सजीव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी छात्रों में जिज्ञासा जगाने के साथ उन्हें अपने देश को गहराई से समझने की प्रेरणा देती है।
संस्कार भारती, उत्तराखण्ड की प्रदेश अध्यक्ष एवं देहरादून कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर ने कहा कि भारत की संस्कृति और ज्ञान परंपरा हमारी सबसे बड़ी पहचान है। युवा अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में संस्कार भारती, उत्तराखण्ड के प्रदेश कार्याध्यक्ष डॉ. गिरीश चन्द्र शर्मा ने भी संबोधित किया। सौहार्द प्रदर्शनी में कुल 98 चित्र प्रदर्शित किए गए।
इस प्रदर्शनी का आयोजन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के विजुअल आर्ट्स डिपार्टमेंट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और संस्कार भारती ने संयुक्त रूप से किया।
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