उत्तराखंड खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 12 दिनों में 88 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की. इसमें 10 प्रतिष्ठानों को बंद भी कराया.
देहरादून: उत्तराखंड में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग और गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण के साथ ही बिक्री पर प्रतिबंध है. इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद अब (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) एफडीए की ओर से प्रदेश भर में संघन अभियान चलाया जा रहा है. ताकि जनता को भ्रमित करने वाले उत्पादों को मार्केट से बाहर किया जा सके. इसके अलावा, इन नकली उत्पादों के इस्तेमाल से लोगों के बीमार होने की संभावना भी बनी हुई है. लिहाजा, प्रदेश में चल रहे अभियान के तहत खाद्य प्रतिष्ठानों में गुणवत्ता के साथ-साथ किचन की स्वच्छता, खाद्य लाइसेंस, कच्चे माल के स्रोत, खरीद के बिल, पैकेजिंग और लेबलिंग की जांच की जा रही है. वर्तमान समय तक 88 प्रतिष्ठानों में छापेमारी की कार्रवाई की गई है.
उत्तराखंड में हर साल खासकर त्योहारी सीजन के दौरान मिलावटखोरी के मामले काफी अधिक बढ़ जाते हैं. जिसके पीछे की मुख्य वजह दुग्ध का सीमित उत्पादन है, लेकिन खपत काफी अधिक है. यही वजह है कि उत्तराखंड में राज्य से लगते हुए अन्य राज्यों के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में एनालॉग पनीर के साथ ही मिलावटी दुग्ध उत्पादन की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी अधिक हानिकारक है. जिसको देखते हुए आगामी त्योहारी सीजन से पहले ही खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने उत्तराखंड राज्य में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग के निर्माण, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. बावजूद इसके बाजारों में आसानी से ऐसे उत्पाद देखे जा रहे हैं.
उत्तराखंड में FDA की ताबड़तोड़ कार्रवाई
ऐसे में खाद्य संरक्षा विभाग ने प्रदेश भर में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है. जिसके तहत प्रदेश के बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों के साथ ही छोटे खाद्य प्रतिष्ठानों पर लगातार छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है. एफडीए के आयुक्त विनय शंकर पांडे की ओर से 7 अगस्त को आदेश जारी किए जाने के बाद से 18 अगस्त तक 88 खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई है. इस दौरान 88 सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए भेज दिए गए हैं. इसके अलावा, करीब 100 किलो पनीर को भी नष्ट किया गया है. यही नहीं, इस अभियान के दौरान 10 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों की ओर से लापरवाही बरतने के कारण उन्हें बंद कराया गया है.
ज्यादा जानकारी देते हुए एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि,
कुछ समय पहले आयुक्त विनय शंकर पांडे की ओर से एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें ये कहा गया था कि प्रदेश में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग और गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण को बैन कर दिया जाए, जिसके तहत प्रदेश भर में इस तरह के उत्पादों पर बैन लगा दी गई है. साथ ही छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है. इस अभियान के तहत अभी तक 88 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की कार्रवाई करते हुए 88 सैंपल एकत्र किए गए हैं. साथ ही ऋषिकेश में 100 किलो एनालॉग पनीर को नष्ट किया गया है.
-ताजबर सिंह जग्गी, अपर आयुक्त, एफडीए-
एफडीए का कहना है कि, प्रदेश भर में रेगुलर बेसिस पर छापेमारी की कार्रवाई चलती रहेगी. एनालॉग पनीर दूध से नहीं बना होता है जिस कारण ये स्वास्थ्य के लिए काफी अधिक नुकसानदायक होता है. इसको रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. पहले छापेमारी की कार्रवाई के दौरान सैंपल लेकर खाद्य सामग्री को नष्ट करने के बाद यह पता लगाया जाता था कि एक खाद्य सामग्री कहां से आया है? लेकिन वर्तमान समय में अन्य राज्यों से संपर्क बनाया गया है, ताकि प्रदेश में अमानकीकृत दुग्ध उत्पादों की सप्लाई ना हो पाए. ऐसे में किस जगह से माल की सप्लाई कहां पर हुई है और वहां से कहां-कहां पर गई है? इसके लिए पूरी चैन को एस्टेब्लिश किया जा रहा है. ऐसे में जो लोग लगातार इस तरह के काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया जा रहा है.
छापेमारी के दौरान जब कोई भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ पाया जाता है तो उसका सैंपल लेकर उसे खाद्य पदार्थ को नष्ट कर दिया जाता है. पहले खाद्य पदार्थों के लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट में काफी अधिक समय लग जाता था, लेकिन अब 14 दिन के भीतर खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जा रही है. रुद्रपुर लैब के अलावा देहरादून में 5000 सैंपल टेस्टिंग कैपेसिटी वाले लैब का संचालन भी शुरू हो गया है. जिससे टेस्टिंग प्रक्रिया काफी अधिक बेहतर हो गई है. पहले सिर्फ जांच सैंपल लिया जा रहा था, लेकिन अब हाइजीन की स्थिति, काम कर रहे कर्मचारियों की ट्रेनिंग समेत तमाम बिंदुओं को भी छापेमारी के दौरान देखा जाता है.
-ताजबर सिंह जग्गी, अपर आयुक्त, एफडीए उत्तराखंड-
इसके लिए खाद्य संरक्षा एवं ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने एक चेकलिस्ट भी तैयार की है, जिसके आधार पर ही छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है. साथ ही जिन भी प्रतिष्ठानों में कमियां पाई जा रही हैं, तत्काल प्रभाव से उस प्रतिष्ठान को बंद कराया जा रहा है. यह अभियान पूरे प्रदेश भर में चल रहा है और छोटे से बड़े सभी प्रतिष्ठानों को इसके दायरे में शामिल किया गया है. जो प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं, उसको बंद करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है. ऐसे में जो प्रतिष्ठान लाइसेंस के साथ संचालित हो रहे हैं, उनका नॉर्म्स के अनुसार छापेमारी की जा रही है.
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