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उत्तराखंड में टिकट के नाम पर ठगी का खुलासा, कई नेताओं से करोड़ों ऐंठने का आरोप – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक चौंकाने वाला ठगी का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. खुद को सक्रिय कांग्रेसी बताने वालीं भावना पांडे ने टिकट और पद दिलाने के नाम पर हुई ठगी को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. लेकिन इस मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहां भावना पांडे खुलकर सामने आई हैं, वहीं कई अन्य नेता अब भी शर्म, लिहाज और डर के कारण सामने आने से बच रहे हैं.
दरअसल, पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद जहां सत्तारूढ़ दल में उत्साह का माहौल था, वहीं कांग्रेस खेमे में निराशा के बीच अचानक हलचल तेज हो गई. इसी दौरान यह जानकारी सामने आई कि एक व्यक्ति ने पार्टी के भीतर सक्रिय नेताओं को बड़े पद और चुनावी टिकट दिलाने का झांसा देकर उनसे भारी रकम वसूल ली.
पंजाब का गौरव था सक्रियबताया जा रहा है कि पंजाब का रहने वाला गौरव नाम का व्यक्ति लंबे समय से उत्तराखंड में सक्रिय था और वह पार्टी की गतिविधियों पर नजर रख रहा था. उसने कई नेताओं से संपर्क साधा और खुद को हाईकमान के करीब बताते हुए भरोसा जीत लिया. वह नेताओं को यह विश्वास दिलाता था कि वह उन्हें संगठन में ऊंचा पद दिलवा सकता है या आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट पक्का करा सकता है. अगर कोई नेता उसकी बातों पर संदेह करता, तो वह बड़े नेताओं के नाम लेकर दबाव बनाता और यहां तक कह देता कि विरोध करने पर शीर्ष नेतृत्व नाराज हो सकता है. इस तरह उसने धीरे-धीरे कई लोगों को अपने जाल में फंसा लिया.
राजपुर थाने में मुकदमा दर्जभावना पांडे ने इस मामले में राजपुर थाने में करीब 25 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है. लेकिन सूत्रों की मानें तो यह रकम केवल एक हिस्सा है. कई अन्य नेताओं से इस कथित ठग ने एक करोड़ से लेकर दो करोड़ रुपये तक की रकम ऐंठी है. इसके बावजूद अधिकांश पीड़ित अब भी सामने आने से बच रहे हैं.
इस चुप्पी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. कुछ नेताओं को डर है कि अगर वे सामने आएंगे तो उन्हें अपने पैसों का हिसाब देना पड़ सकता है, जिससे आय के स्रोत पर सवाल उठ सकते हैं. वहीं, कुछ को अपनी राजनीतिक छवि खराब होने का भी भय सता रहा है. यही वजह है कि वे चाहकर भी पुलिस तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
पुलिस के लिए बड़ी चुनौतीइस बीच पुलिस के लिए भी यह मामला चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है. यदि जांच आगे बढ़ती है, तो कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए कई और नाम सामने आ सकते हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाकी पीड़ित नेता खुद आगे आते हैं या पुलिस उन्हें तलाश कर सामने लाती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टियों के अंदर चल रही टिकट और पद की होड़ को भी उजागर करता है. चुनाव से पहले नेताओं की सक्रियता बढ़ना आम बात है, लेकिन इसी माहौल का फायदा उठाकर ठगों द्वारा इस तरह की घटनाएं अंजाम देना चिंताजनक है.
कांग्रेस के लिए बढ़ी मुश्किलकुल मिलाकर, यह मामला कांग्रेस के लिए दोहरी परेशानी बन गया है. एक तरफ चुनावी तैयारियों के बीच संगठन को मजबूत करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर इस ठगी ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति और नेताओं की मजबूरी को भी उजागर कर दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आगे क्या खुलासा होता है और कितने लोग इस मामले में सामने आते हैं.

Nandni sharma

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