पोर्टल नहीं खुला तो यूजी, पीजी और 12वीं के कंपार्टमेंट में पास हुए छात्रों को नहीं मिलेगा इस साल दाखिला
विश्वविद्यालयों को स्वायत्ता, नकेल शिक्षा विभाग के हाथ
देहरादून। प्रदेश सरकार भले ही सुदूर गांव के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सहूलियतें दे रही हो, लेकिन अधिकारी सरकारी प्रयासों पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। श्रीदेव सुमन और कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबंधित कालेजों में इस बार 12वीं रामनगर और सीबीएसई की कंपार्टमेंट परीक्षाओं में पास होने के बावजूद इन छात्रों को दाखिला नहीं मिलेगा। इसके अलावा कई यूजी और पीजी छात्रों को भी दाखिले से वंचित रहना पड़ सकता है। समर्थ पोर्टल न खुलने से इन छात्रों को दाखिला नहीं मिल रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि समर्थ पोर्टल खोलने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ही पोर्टल खोलने का फैसला लेगा।कुमाऊं और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय की पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं 6 दिसम्बर से शुरू हो रही हैं। परीक्षाएं वही छात्र दे पाएंगे जो कि समर्थ पोर्टल पर पंजीकृत हों। कालेजों का तर्क है कि बैक पेपर, नीट मॉप अप राउंड, सीयूईटी के तहत कालेज मिलने का इंतजार कर रहे छात्रों को अब कुमाऊं और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालयों में भी दाखिला नहीं मिलेगा। इन्हें तभी दाखिला मिल सकेगा जब समर्थ पोर्टल खुलेगा और उच्च शिक्षा विभाग पोर्टल खोलने के लिए तैयार नहीं है।
कालेज प्रबंधन एसोसिएशन ने इस संबंध में शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत से गुहार लगाई थी कि पोर्टल एक दिन के लिए खोल दिया जाएं ताकि छात्रों को समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण किया जा सके। डा. धन सिंह रावत ने उच्च शिक्षा विभाग को पोर्टल खोलने के निर्देश दिये लेकिन पोर्टल नहीं खुला।
इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग में समर्थ पोर्टल के इंचार्ज असिस्टेंट डायरेक्टर दीपक पांडे ने कहा कि 180 दिन पढ़ाई की शर्त भी है। इसके अलावा पोर्टल खोलने न खोलने का फैसला अथारिटी करती है। यदि अथारिटी कहेगी तो पोर्टल खोल दिया जाएगा।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय का तर्क है कि विभाग ही पोर्टल खोल सकता है। जबकि कालेजों में दाखिला देना, नियम बनाने और उसका अनुपालन करना और समर्थ पोर्टल भी विश्वविद्याय के दायरे में होना चाहिए। समर्थ पोर्टल पर उच्च शिक्षा विभाग का कब्जा होने से अब सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। बता दें कि शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत कोलकत्ता गये हैं।
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