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देहरादून। प्रदेश में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिए हैं। इसके साथ ही हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक में भी राज्य सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया।
प्रदेश में वर्तमान में 40 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं, जो लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रही हैं। फिलहाल इन्हें केंद्र सरकार की ओर से 4500 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 4800 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। राज्य सरकार अब इस मानदेय को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कमेटी गठित, रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने की तैयारी
सरकार ने मानदेय वृद्धि को लेकर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा के अनुसार, विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें यह भी दर्शाया गया है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कितना मानदेय दिया जा रहा है तथा अन्य राज्यों में इन्हें कितना भुगतान किया जाता है।
प्रदेश में 24 हजार भोजन माताएं कार्यरत
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में 24 हजार भोजन माताएं कार्यरत हैं। पीएम पोषण योजना के तहत कार्यरत इन भोजन माताओं को वर्तमान में 3000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। इसमें 900 रुपये केंद्र सरकार और 100 रुपये राज्यांश, जबकि 2000 रुपये राज्य सरकार अलग से देती है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भोजन माताओं के मानदेय वृद्धि को लेकर भी शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
आशा कार्यकर्ताओं को भी मिलेगा लाभ
सरकार की योजना के अनुसार, आंगनबाड़ी और भोजन माताओं के साथ-साथ आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय भी बढ़ाया जाएगा। प्रदेश में वर्तमान में 12 हजार आशा कार्यकर्ता सेवाएं दे रही हैं। जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
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