कथावाचक गणेश शास्त्री महाराज ने की गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग
नकरौंदा में भागवत कथा का आयोजन, बोले, श्रीमद् भागवत सुनने से मिट जाते हैं जन्म जन्मांतर के पाप
देहरादून। प्रख्यात कथावाचक गणेश शास्त्री जी महाराज ने कहा है कि यदि देश को सुरक्षित रखना है तो हमें सनातन धर्म की सुरक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए सभी हिन्दुओं को एकजुट होना होगा।
भागवत सुनने मात्र से मिलता है पुण्य
कथावाचक गणेश शास्त्री महाराज देहरादून के नकरौंदा में इन दिनों भागवत कथा का प्रवचन कर रहे हैं। इसका आयोजन समाजसेवी मनोज नौटियाल ने अपनी माता गोदाम्बरी देवी की स्मृति में किया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य जीवन में भाग्य से नहीं सौभाग्य से सुनने को मिलता है। वेदों का सार युगों-युगों से मानव जाति तक पहुंचता रहा है। भागवत महापुराण यह उसी सनातन ज्ञान का भंडार है। जो वेदों से प्रवाहित होती चली आ रही है। यह एक ऐसी अमृत कथा है जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। परीक्षित ने स्वर्गामृत के बजाए कथामृत की मांग की थी। जब पुण्य का उदय होता है तो कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि चैतन्य, सौंदर्य, ऐश्वर्य तथा भागवत भाव कि वह वाणी हमारे जड़वत जीवन में चैतन्यता का संचार करती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है। कथा प्रवचन और विभिन्न प्रसंग के बीच संगीतमय भजनों पर श्रोता मुग्ध रहे।
मस्जिद या दरगाह क्यों जाना?
प्रवचन के दौरान कथावाचक गणेश शास्त्री ने कहा कि मन्दिर-मस्ज़िद विवाद पर उन्होंने कहा जो हमारी चीजें हैं वह हमें मिलनी चाहिए। हिंदुओं को दरगाह पर जाने की क्या आवश्यकता है। किसी के देवी देवताओं पर अपना मन मत भ्रमित होने दो। क्या मुसलमान हमारे मन्दिर में आते हैं.? हम सबको मिलकर सनातन की रक्षा करनी चाहिए। सभी हिन्दुओं को एकजुट होना होगा।
गाय हो राष्ट्रमाता घोषित
कथावाचक गणेश शास्त्री जी महाराज ने कहा गाय को राष्ट्र माता घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि वर्तमान में सनातन को मजबूत होने के लिए लगातार कार्य हो रहा है। हमें सद्गुरु को अपनाना चाहिए। ढोंगी गुरुओं और बाबाओ से दूर रहना चाहिए। आजकल गुरू तो सब बनना चाहते हैं चेला कोई नहीं बनना चाहता।
अब तक कर चुके हैं 470 भागवत
कथावाचक गणेश शास्त्री महाराज का फिरोजपुर रायपुरा पंचकूला हरियाणा में भक्ति दीप नाम से आश्रम है। वह कथावाचक होने के साथ-साथ प्रखण्ड ज्योतिषाचार्य भी हैं। कथावाचक गणेश शास्त्री महाराज अब तक 470 से अधिक भागवत कर चुके हैं। अपने नाना जी सूरजमणि उनियाल के साथ महज 13 साल की उम्र से महाराज हरि भक्ति में रम गए थे। नाना जी ही इनके धार्मिक गुरु भी थे। नानाजी के सानिध्य में ईश्वर की कठिन साधना की। कथावाचक गणेश शास्त्री महाराज का कहना है कि ठाकुर जी ने उन्हें इस कार्य के लिए चुना है। उनके अनुसार भगवान बहुत मार्मिक विषय है लेकिन कुछ कथा वाचकों के कारण कथा ब्यथा ज्यादा हो गई है। भगवान को तमाशा बनाकर पेश किया जा रहा है जबकि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि विधित्व कथा वाचक या प्रवक्ता को चुनना चाहिए।
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