Categories: hindiUttarakhand

उत्तराखंड High Court का अहम फैसला, 11% अटेंडेंस वाले छात्र को राहत देने से इनकार – myuttarakhandnews.com

नैनीताल। हाईकोर्ट ने कानून के छात्र को अपने 8वें सेमेस्टर की अंतिम परीक्षाओं के शेष पेपर देने की अनुमति देने के लिए निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है। छात्र को अत्यधिक कम उपस्थिति के कारण परीक्षा देने से रोका गया था। यह याचिका तब दायर की गई थी जब छात्र—जिसकी 8वें सेमेस्टर में उपस्थिति मात्र 11 प्रतिशत थी, को 5 मई से शुरू हुई अंतिम परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी। उसने अधिकारियों को शेष पेपर देने की अनुमति देने के लिए ‘रिट ऑफ मैंडमस’ की मांग की थी।
विधिक शिक्षा नियम, 2008 पर भरोसाभारतीय बार काउंसिल (बीसीआई) ने विधिक शिक्षा नियम, 2008 पर भरोसा किया। यह प्रस्तुत किया गया कि नियमों के अनुसार प्रत्येक सेमेस्टर में परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति की आवश्यकता होती है। बीसीआई ने आगे एक सीमित छूट तंत्र की ओर इशारा किया: जहां उपस्थिति 65 प्रतिशत और 70 प्रतिशत के बीच होती है, वहां संबंधित कुलपति या डीन छूट दे सकते हैं।
प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर, बीसीआई ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की उपस्थिति छूट की खिड़की से भी काफी नीचे थी, जिससे विवेकाधिकार की कोई गुंजाइश नहीं बची। यह भी तर्क दिया गया कि एक मैंडमस को इस तरह से जारी नहीं किया जा सकता है जो वैधानिक प्रावधानों के विपरीत कार्रवाई करने के लिए मजबूर करता हो।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने बीसीआई की प्रस्तुतियों के सार को स्वीकार किया, यह मानते हुए कि बीसीआई के बनाए गए उपस्थिति नियम वैधानिक प्रकृति के हैं। यह दोहराते हुए कि एक रिट ऑफ मैंडमस सार्वजनिक प्राधिकरण को कानून के विपरीत कार्य करने की आवश्यकता नहीं कर सकती।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक निर्णय पर भरोसा किया, लेकिन बीसीआई ने अदालत को सूचित किया कि उक्त निर्णय को नारसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और यह विचाराधीन है। संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों पर, उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करने की इच्छा नहीं जताई।
अदालत ने कानून कॉलेजों में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम उपस्थिति मानकों को निर्धारित करने में बीसीआई की नियामक भूमिका पर जोर दिया, यह देखते हुए कि सहानुभूतिपूर्वक न्यूनतम उपस्थिति पूरी न करने वाले छात्रों को अनुमति देना प्रतिकूल होगा, जो कानूनी शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों में “अराजकता” को बढ़ावा दे सकता है और शैक्षिक मानकों को कम कर सकता है।
बीसीआई से संपर्क करने की अनुमतिमांग की गई मैंडमस को अस्वीकार करते हुए, अदालत ने याचिका का निपटारा इस प्रकार किया कि छात्र को एक अभ्यावेदन के माध्यम से बीसीआई से संपर्क करने की अनुमति दी। यदि 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत किया जाता है, तो बीसीआई को इसे विचार करने और एक सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया।

Nandni sharma

Share
Published by
Nandni sharma

Recent Posts

उत्तराखंड के युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, देहरादून में STPI केंद्र का उद्घाटन –

 देहरादून, । उत्तराखंड में प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में…

3 hours ago

नई धुन, नए अंदाज़ और नए स्थान पर बेहतरीन अदाकारी से सुसज्जित “विरासत महोत्सव-2026” का सजा आकर्षक भव्य मंच  –

    देहरादून –  – ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहरों को संजोए रखने तथा उनका शानदार संकलन वर्षों से…

3 hours ago

ग्राफिक एरा में हिमालयी वस्त्रों पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू –

  देहरादून,  ग्राफिक एरा में विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक वस्त्र कलाएँ सांस्कृतिक…

3 hours ago

शिक्षक की पत्नी ने तीन बच्चों संग आत्मदाह की चेतावनी दी, शिक्षा विभाग में हलचल – myuttarakhandnews.com

डालकन्या भोलापुर के राजकीय इंटर कॉलेज में दो शिक्षकों के विवाद का मामला गरमाया; पत्नी…

4 hours ago

तीनपानी फ्लाईओवर पर तेज रफ्तार कार पलटी, मचा हड़कंप | High speed car overturns on teenpani flyover causing a stir | my uttarakhand news

तीनपानी फ्लाईओवर पर तेज रफ्तार कार पलटी, मचा हड़कंप | High speed car overturns on…

5 hours ago