देहरादून. बीते सोमवार की रात हुई मूसलाधार बारिश ने देहरादून में कहर बरपा दिया है. अतिवृष्टि के चलते उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की नदियों का जलस्तर बढ़ गया. वहीं सहस्त्रधारा में बादल फटने से उफान पर आई नदियों का मलबा और पानी ने क़ई लोगों का नुकसान कर दिया. नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी किनारे बसी गरीब बस्तियों में तबाही मच गई. रिस्पना वार्ड में रिस्पना नदी के पानी के तेज बहाव के साथ आया मलबा दुकानों और मकानों में घुस गया. रात को आये पानी ने सभी को इतना डरा दिया कि लोगों ने घर से बाहर बैठकर रात गुजारी है. इस त्रासदी ने उन लोगों के जीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है, जिनके पास पहले से ही बहुत कम था.
नदी का रौद्र रूप देख डरकर कट रहीं रातें
रिस्पना वार्ड निवासी सीमा देवी ने बताया कि रात को अचानक रिस्पना नदी का जलस्तर बढ़ गया और पानी उनके घरों में घुस आया. पानी की भयानक आवाजें और बहाव देखकर वे लोग घर के बाहर निकले और बच्चों के साथ बाहर ही रातभर बैठकर काटी. उन्होंने बताया कि क़ई लोगों का सामान बह गया तो राशन भी खराब हो गया. बच्चों को भूखे पेट ही मजबूरन रहना पड़ा. मलबा घर में घुसने से बिस्तर, कपड़े से लेकर फ्रीज आदि खराब हो गया. उन्होंने कहा कि रिस्पना नदी, जो हमेशा एक शांत धारा के रूप में बहती है, कल रात विकराल रूप में सामने आई जब 11-12 बजे अचानक पानी आया. वे कई दशकों से यहां रह रहे हैं, लेकिन इतना भयानक रूप उन्होंने कभी नहीं देखा कि उन्हें परिवार समेत अपनी जान बचाकर भागना पड़ा. पहाड़ों पर हुई भारी बारिश का पानी तेजी से शहर की ओर बढ़ा और नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया. रात के अंधेरे में क़ई लोग जब गहरी नींद में थे, तब पानी उनके घरों में घुस गया. अचानक नींद टूटी तो सब कुछ छोड़कर भागना पड़ा. कुछ ही घंटों में यहां की कुछ झोपड़ियां, कच्चे घर, और यहां तक कि पक्के मकानों की दीवारें भी पानी के तेज बहाव में ढह गईं.दुकानदारों को भारी नुकसान
नितिन ने बताया कि वह पिछले 20 से 25 सालों से कपड़ों की दुकान के जरिए अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं.अचानक से रात में और सुबह को पानी उनके दुकान में आ गया. उनके कपड़े और सामान मलबे से खराब हो गया. हजारों का सामान इस आफत ने तबाह कर दिया और 50 से 60 हजार रुपये भी उनके बह गए. उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में दुकानदारों की इतनी कमाई नहीं हो पाती है, जितना नुकसान उन्हें झेलना पड़ा है.
सड़कों पर आये दिहाड़ी -मजदूरी करने वालों के परिवार
राहुल ने बताया कि वह दिहाड़ी -मजदूरी करके बच्चों को पालते हैं. अचानक घरों में पानी और मालवा घुसने से उनके छोटे-छोटे बच्चे घबरा गए. उनके पिता और बच्चों को लेकर वह भागे. उन्हें समझ नहीं आया कि सामान को कैसे बचाएं? उन्होंने बताया कि उनके मकान की पिछली दीवार गिर गई और सामान बह गया घर में मलबा भी घुस आया. अब बच्चों को लेकर वह कैसे इस त्रासदी को भूल नए जीवन की शुरुआत करें क्योंकि उनकी पूंजी बह गई. रिस्पना नदी के किनारे बसे क़ई लोग उनकी तरह ही दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, और छोटे-मोटे काम करके ही अपना जीवन चलाते हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूँजी लगाकर ये छोटे-छोटे घर बनाए थे लेकिन एक ही बारिश में उनकी सारी मेहनत पानी में बह गई. उनके पास न तो कोई छत बची है, न ही कोई सामान बचा है. खाने-पीने का सामान, कपड़े, बर्तन, और बच्चों की किताबें सबको पानी बहा ले गया. इस क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. हलांकि देहरादून नगर निगम की टीमें मलबा बाहर करती नजर आयी है लेकिन विकराल रूप धारण करने वाली रिस्पना नदी ने कमजोर वर्ग के परिवारों की और कमर तोड़ दी है.
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