अच्छी लाइफ सेट करने में कौन-सा सिलेबस बड़ा: स्कूल का या फिर जिंदगी का? – my uttarakhand news

अच्छी लाइफ सेट करने में कौन-सा सिलेबस बड़ा: स्कूल का या फिर जिंदगी का?अतुल मालिकराम , पी आर कंसलटेंट
आपको 3 इडियट्स का यह गाना तो याद ही होगा
“गिव मी सम सनशाइनगिव मी सम रेनगिव मी अनदर चांसआई वॉना ग्रो उप वन्स अगेन”
“99 परसेंट मार्क्स लाओगे, तो घड़ी वरना छड़ी”
अक्सर आपने यह भी सुना होगा कि 10वीं कक्षा अच्छे अंकों से पास कर लो, फिर लाइफ सेट हो जाएगी। या 12वीं कक्षा अच्छे अंकों से पास कर लो, फिर लाइफ सेट हो जाएगी।
क्या सच में ऐसे लाइफ सेट होती है? क्या स्कूल की पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद भी आप संतुष्ट हैं? बिलकुल नहीं। स्कूल में बिताया समय या सिलेबस सिर्फ आने वाली परीक्षा की तैयारी के लिए था। लेकिन कौन-सी परीक्षा? इस परीक्षा का नाम है ‘जिंदगी’। जब स्कूल का यह सिलेबस आपकी जिंदगी से मेल ही खाता, तो क्या लाइफ सेट हो पाएगी? क्या आपके मन में भी कभी यह प्रश्न उठा कि उन कई-कई रातों की नींद नीलाम कर और बस्तों का बोझ ढोकर जो पन्ने पढ़े गए, वो एक सार्थक जीवन जीने के लिए कैसे उपयोगी होंगे?
हमें बेहतर नौकरी पाने के लिए और अधिक पढ़ाई करने के लिए कहा गया था, जो हमें जिंदगी की सारी सुख-सुविधाएँ दे सके, लेकिन क्या केवल पैसा ही काफी है? माना कि पैसे का अपना महत्व है, जिसे हम बखूबी समझते हैं, पैसे जीवन के कई क्षेत्रों में हमें बहुत मदद करते हैं। लेकिन स्कूल में और भी अच्छी बातें सीखना भी जरुरी है, जो स्कूल के बाद भी काम आती हैं; ऐसी बातें, जो सिलेबस से अलग हों; ऐसी बातें, जो एक बार सीख ली, तो भविष्य में आने वाली तमाम चुनौतियों से पार पाया जा सकता है; ऐसी बातें, तो जरूरतमंदों की मदद करने का पाठ पढ़ाती हैं; ऐसी बातें, जो खुद से ऊपर सोचने के लिए हमें प्रेरित करती हैं।
कैसा हो, यदि स्कूल में हमें अपनी भावनाओं को संभालने, अपने और दूसरों के साथ अपने संबंधों को समझने, संकट में दूसरों की मदद करने, बेहतर निर्णय लेने के लिए जागरूक करने, असफलताओं से सीखने और उनका सामना करने, पैसों का सही तरीके से उपयोग करने और अपना खर्च खुद उठाने के बारे में सिखाया जाए? साथ ही, हमें बेहतर तरीके से समय बिताने, खुलकर स्वस्थ जीवन जीने, खुशमिज़ाज़ रहने और अपने जुनून या पसंदीदा काम को करने के लिए आगे बढ़ना सिखाया जाए। और भी बहुत से उदाहरण पड़े हैं, जिन्हें यदि हम स्कूलों में ही सीख लेंगे, तो बाद में यह सब सीखने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

pooja Singh

Share
Published by
pooja Singh

Recent Posts

एसजीआरआर की ऑन्कोलॉजी टीम ने राष्ट्रीय सम्मेलन में हासिल की बड़ी उपलब्धि, जीते शीर्ष पुरस्कार

देहरादून स्थित श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (SGRR) के लिए…

7 hours ago

पहाड़ में बागवानी से संवर रही जिंदगी, दीपक नौटियाल की पहल से 120 महिलाओं को मिला रोजगार

कीवी से लेकर माल्टा तक की खेती; महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद देश-विदेश तक…

7 hours ago

कन्या पूजन तभी सार्थक, जब बेटियों को मिले सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर : मुख्यमंत्री –

  देहरादून,मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने  देहरादून स्थित आईआरटीडी प्रेक्षागार में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर…

8 hours ago