हल्द्वानी : मिडिल ईस्ट में जारी इजरायल, अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच लोगों की चिंता बढ़ने लगी है. देवभूमि उत्तराखंड में लोग अभी से गैस और पैट्रोल को लेकर चिंतित दिख रहे हैं, क्योंकि युद्ध और आगे बढ़ने की स्थिति में इसी सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसको लेकर पर्वतीय क्षेत्र के लोगों में चिता है और वो पहले से ही पेट्रोलियम पदार्थों का स्टॉक अपने पास रखने में जुट गए हैं. लोगों का साफ तौर पर कहना है कि अभी जिस तरह से जंग के हालात हैं और ये आगे भी बने रहे तो जाहिर तौर पर इसमें कमी आएगी. ऐसे में दाम बढेंगे. आइये जानते हैं इस रिपोर्ट में…
इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग ने यहां से तकरीबन 2600 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद उत्तराखंड के लोगों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं. लोगों को खाना पकाने वाली एलपीजी और पीएनजी गैस के साथ ही गाड़ियों में भरने के लिए पेट्रोल, डीजल और सीएनजी को लेकर चिंता है. इसीलिए लोग घर का खाली सिलेंडर तुरंत भर रहे हैं. यही नहीं गाड़ी वाले पेट्रोल टंकी भी लोग फुल करा रहे हैं, ताकि संकट का मुकाबला किया जा सके. लोगों से बातचीत में उनकी चिंताएं भी जाहिर होने लगी हैं.
स्थानीय निवासी जावेद अहमद कहते हैं कि अगर ये जंग के हालात यूं ही बने रहे तो निश्चित तौर पर पेट्रोलियम और गैस के दाम बढेंगे. मीडिया रिपोर्ट कहती हैं कि हमारे पास रिजर्व ऑयल 50 फीसदी के आसपास ही हैं. इससे साफ है कि दाम तो बढेंगे ही. इससे महंगाई बढेगी.
पर्वतीय पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र चड्ढा कहते हैं कि पब्लिक और इंडस्ट्री की जरूरतों को देखते हुए भारत में आमतौर पर करीब 70 से 75 दिनों का स्टॉक भंडारण क्षमता के तौर पर मौजूद रहता है. मौजूदा हालात में करीब 5 से 6 दिन गुजर चुके हैं, इसलिए अभी भी देश के पास लगभग 68–70 दिनों का स्टॉक उपलब्ध माना जा सकता है. हालांकि अगर यही स्थिति 10 दिन तक और बनी रहती है, तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. स्टॉक मौजूद रहेगा, लेकिन लगातार आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, जिससे थोड़ी तंगी की स्थिति बन सकती है. फिलहाल आज की तारीख में देश में ऐसी कोई समस्या नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है.
दरअसल, सरकार अपने इस्तेमाल के लिए पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का 10 दिन तक का रिजर्व स्टॉक रखती है. वहीं जनता के लिए 70 दिनों का स्टॉक होता है. पूरे विश्व में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ईरान, ओमान, लेबनान, इराक, कुवैत और कतर वो इलाके हैं, जहां से भारत समेत पूरे विश्व में पेट्रोलियम पदार्थों की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है. युद्ध के कारण ये सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. ऐसे में भारतीय कंपनियों के पास महज 50 से 60 दिन का पेट्रोल स्टॉक बचा हुआ है.
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