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देहरादून: पहाड़ों की रानी मसूरी में आए दिन लोगों को जाम की समस्या से गुजरना पड़ता है. मगर, अब जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देहरादून से मसूरी के बीच यातायात को सुगम बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है. दरअसल, देहरादून से मसूरी तक लगभग 3500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत दो लेन हाईवे बनाए जाएंगे. इसके लिए केंद्र सरकार ने औपचारिक मंजूरी दे दी है.
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग के निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि 3500 करोड़ से बनने वाले इस 42 किलोमीटर लंबे दो-लेन हाईवे के एलाइनमेंट को केंद्र सरकार ने औपचारिक मंजूरी दे दी है. यह नया रूट झाझरा से शुरू होकर मसूरी के लाइब्रेरी चौक तक जाएगा. उन्होंने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पर्यटन नगरी मसूरी के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करना है, ताकि मौजूदा सड़कों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके.
दो बड़ी सुरंगें बनेंगी आकर्षण और सुविधा का केंद्रइस नेशनल हाईवे की सबसे बड़ी खासियत इसमें बनने वाली दो अत्याधुनिक सुरंगें होंगी. भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए और यात्रा के वक्त को कम करने के लिए जॉर्ज एवरेस्ट के नीचे 2.9 किमी लंबी सुरंग बनाने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही, मसूरी की पहाड़ियों को पार करने के लिए दो किलोमीटर लंबी एक दूसरी सुरंग का भी निर्माण किया जाएगा. ये सुरंगें न सिर्फ सफर को छोटा करेंगी, बल्कि संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे से भी यात्रियों को बचाएंगी.
वाडिया संस्थान करेगा ज्योग्राफिकल सर्वेसौरभ सिंह ने जानकारी दी कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग ने सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया है. मिट्टी की जांच और विस्तृत भौगोलिक सर्वेक्षण का कार्य वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान को सौंपा गया है. संस्थान के वैज्ञानिकों ने प्रस्तावित एलाइनमेंट के आधार पर सर्वे का काम शुरू कर दिया है. यह सर्वे तय करेगा कि सुरंगों और सड़क का निर्माण किन तकनीकों के माध्यम से किया जाए ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो और भविष्य में सड़क धंसने जैसी समस्याओं से बचा जा सके.
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गतिउन्होंने आगे कहा कि एलाइनमेंट की स्वीकृति के साथ ही परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो गई है. इस नए मार्ग के बनने से देहरादून के पश्चिमी छोर से आने वाले यात्रियों को शहर के बीच के ट्रैफिक से नहीं जूझना पड़ेगा. इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि मसूरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन के नए अवसर भी खुलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचने की उम्मीद है.
इस परियोजना पर दूनवासियों की रायदेहरादून के रहने वाले राय सिंह रावत का कहना है कि देहरादून से दिल्ली तक एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहा है जिसके चलते पर्यटकों की संख्या और ज्यादा बढ़ जाएगी. यह अल्टरनेटिव रूट बेहद कारगर साबित होगा. वहीं हरेंद्र कुमार ने बताया कि मसूरी के लिए प्रेमनगर झाझरा से जाने वाला यह रूट विकास की दृष्टि से एक मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा. मगर, इसके लिए ध्यान रखना है कि वनों का अंधाधुंध कटान ना किया जाए क्योंकि मसूरी की हरियाली देखने के लिए ही पर्यटक यहां आते हैं. संजय का कहना है कि देहरादून में लगातार कंस्ट्रक्शन और गाड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही है. यहां टूरिस्ट सीजन में स्थानीय लोगों को भी परेशानी होती है, आने वाले 10 सालों में ऐसे रूट लोगों को सहूलियत देंगे.