खेल महाकुंभ-2026 : गांवों की प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच, शुरू हुई तैयारी –

 
चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को निखारने और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित होने वाला खेल महाकुंभ-2026 (मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी) एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। चमोली जिले में इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में आयोजन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
इस वर्ष खेल महाकुंभ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतियोगिताएं न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधानसभा, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर तक पहुंचेंगी। इससे दूरस्थ गांवों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
चमोली जैसे पर्वतीय जिले में अनेक खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते। खेल महाकुंभ ऐसे खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा अवसर माना जाता है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से न केवल प्रतिभाओं की पहचान होगी, बल्कि उन्हें उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का रास्ता भी मिलेगा।
कार्यक्रम के अनुसार न्याय पंचायत स्तर की प्रतियोगिताएं 1 से 10 सितंबर, विधानसभा स्तर की 11 से 20 सितंबर और संसदीय क्षेत्र स्तर की प्रतियोगिताएं 21 से 30 सितंबर तक आयोजित होंगी। इसके बाद चयनित खिलाड़ी राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।इस बार खिलाड़ियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन चाहता है कि अधिक से अधिक खिलाड़ी इसमें भाग लें। इसके लिए स्कूलों, महाविद्यालयों, युवा कल्याण विभाग और स्थानीय खेल संगठनों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेल महाकुंभ केवल पदक जीतने का आयोजन नहीं है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखते हुए खेल संस्कृति को बढ़ावा देना भी है। नियमित खेल गतिविधियां युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करती हैं।
हर वर्ष खेल महाकुंभ में हजारों खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, लेकिन बड़ी चुनौती यह रहती है कि प्रतियोगिता के बाद उभरती प्रतिभाओं को निरंतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और आर्थिक सहयोग मिले। यदि चयनित खिलाड़ियों को आगे भी व्यवस्थित प्रशिक्षण और अवसर मिलते हैं, तभी यह आयोजन अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल कर सकेगा। चमोली जैसे पर्वतीय जिले के लिए खेल महाकुंभ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि गांव-गांव में छिपी प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उन्हें राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का मजबूत माध्यम बन सकता है।

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