
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में वर्ष 2018 से बाघों के शिकार और उससे जुड़ी अनियमितताओं की रुकी हुई जांच एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने डी एस खाती, उत्तराखंड सरकार, केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि जिस अधिकारी पर बाघ शिकार में मिलीभगत के गंभीर आरोप स्थापित हो चुके हैं, उसी ने सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर जांच पर रोक (स्टे) हासिल की और इस प्रक्रिया में न्यायालय को गुमराह किया गया।
अरोड़ा ने तर्क दिया कि जांच रुकी रहने से सत्य सामने आने में देरी हुई और इससे आरोपित अधिकारियों को संरक्षण मिला उन्होंने स्टे हटाकर जांच को आगे बढ़ाने की मांग की।
वहीं डी एस खाती के वकील ने अदालत से कहा कि स्टे हटाने की मांग काफी लंबे अंतराल के बाद की गई है और याचिका में लगाए गए आरोप इतने गंभीर हैं कि जवाब तैयार करने के लिए उन्हें अतिरिक्त समय चाहिए।
बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया ।
मामले की पृष्ठभूमि : नेपाल से कॉर्बेट तक फैला शिकारी नेटवर्क
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में बाघों के अवैध शिकार का खुलासा 2015 में नेपाल में पकड़े गए तस्करों के पास मिली बाघ की खाल से हुआ, जिसकी जांच में पता चला कि खाल कॉर्बेट से तस्करी कर लाई गई थी। 2016 में हरिद्वार एसटीएफ ने 5 बाघों की खालें और 125 किलो हड्डियाँ बरामद कीं, जिनमें से चार खालें कॉर्बेट की ही पाई गईं। इन घटनाओं ने रिज़र्व में गहरी स्तर पर फैले शिकार और भ्रष्टाचार के नेटवर्क की पुष्टि की।
NTCA, WII और वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी जयराज की जांच में डी. एस. खाती, तत्कालीन निदेशक समीर सिन्हा सहित कई अधिकारियों पर लापरवाही और मिलीभगत के गंभीर आरोप सामने आए। इसके आधार पर सितंबर 2018 में हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए।
लेकिन हाईकोर्ट के आदेश में याचिका नंबर की एक टाइपिंग गलती के आधार पर डी. एस. खाती सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहाँ 22 अक्टूबर 2018 को तकनीकी कारणों से CBI जांच पर रोक लग गई। 2023 में CBI ने स्वयं स्टे हटाने का अनुरोध किया, पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
सबसे विवादित पहलूरू आरोपी अधिकारी को मिली उच्च जिम्मेदारी
इस पूरे मामले ने तब और सवाल खड़े किए जब जिन आईएफएस अधिकारी समीर सिन्हा पर इसी बाघ शिकार मामले में गंभीर आरोप हैं उन्हें जून 2025 में उत्तराखंड का हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) नियुक्त कर दिया गया, संवेदनशील और सर्वोच्च पद पर आरोपी अधिकारी की नियुक्ति ने राज्य सरकार की मंशाए पारदर्शिता और वन संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए ।
आगे क्या
अब सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर सभी पक्षों से जवाब मांगा है, इससे यह उम्मीद जगी है कि सालों से रुकी हुई CBI जांच शायद दोबारा शुरू हो सके।
