देहरादून, राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य पर उत्तराखंड की बढ़ती पहचान को सशक्त करते हुए, देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल (डीडीएलएफ) ने श्रीनगर में आयोजित तीसरे चिनार बुक फेस्टिवल में राज्य का प्रतिनिधित्व किया।
इस अवसर पर देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित ‘गार्डियंस ऑफ द हिमालयाज़ अवॉर्ड’ प्रख्यात पर्यावरण कानून विशेषज्ञ एवं संरक्षणवादी नदीम कादरी को प्रदान किया गया।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जिला प्रशासन, श्रीनगर के सहयोग से आयोजित इस पुस्तक महोत्सव में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआईसीसी) में साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने सहभागिता की।
नदीम कादरी कश्मीर के पंपोर स्थित द नेचर यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं तथा जम्मू-कश्मीर के अग्रणी पर्यावरण कानून विशेषज्ञों, संरक्षणवादियों और नीति विशेषज्ञों में उनकी गणना होती है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में जम्मू, कश्मीर और लद्दाख से जुड़े पर्यावरणीय मामलों में एमिकस क्यूरी के रूप में सेवाएं दी हैं। वर्ष 2023 में उन्हें ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) का सदस्य नियुक्त किया गया। वे वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन फंड (डब्ल्यूसीएफ) के संस्थापक भी हैं तथा संकटग्रस्त कश्मीरी बारहसिंगा (हंगुल) के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘प्रोजेक्ट हंगुल’ के प्रमुख प्रेरणास्रोत हैं।
यह सम्मान प्रख्यात फिल्म निर्माता तथा देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के पैट्रन एवं मेंटर इम्तियाज़ अली और फेस्टिवल के संस्थापक एवं प्रोड्यूसर समरांत विरमानी द्वारा प्रदान किया गया।
देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला ‘गार्डियंस ऑफ द हिमालयाज़ अवॉर्ड’ उन व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित करता है जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक जागरूकता तथा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस सम्मान के माध्यम से फेस्टिवल हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तराखंड की प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
महोत्सव में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए समरांत विरमानी को “बियॉन्ड द पोस्टकार्ड: रीडिफाइनिंग टूरिज्म थ्रू लिटरेचर, बुक्स, म्यूज़िक एंड डिजिटल इनोवेशन्स” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में वक्ता के रूप में भी आमंत्रित किया गया।
साहित्य, सिनेमा, संगीत और कला की परिवर्तनकारी शक्ति पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा, “पहाड़ों में पर्यटन का कोई ऑन और ऑफ सीजन नहीं होना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि पूरे वर्ष पहाड़ी क्षेत्रों में सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों को बढ़ावा दिया जाए तथा लगभग हर महीने ऐसे कार्यक्रम आयोजित और क्यूरेट किए जाएं। साथ ही बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित की जानी चाहिए, क्योंकि पुस्तकें कल्पनाशीलता को विस्तार देती हैं और रचनात्मकता को नई उड़ान प्रदान करती हैं।”
अपने संबोधन के माध्यम से समरांत विरमानी ने लोगों को अधिक से अधिक पढ़ने, सार्थक संवाद करने, पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति सजग रहने तथा आजीवन सीखने की भावना को बनाए रखने का संदेश दिया।
अब सभी की निगाहें देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के आठवें संस्करण पर हैं, जिसका आयोजन 27 से 29 नवंबर 2026 तक दून इंटरनेशनल स्कूल, देहरादून में “लाइफ, लिटरेचर एंड लेगेसी” विषय के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश के लेखक, चिंतक, कलाकार और पाठक एक बार फिर विचारों की परिवर्तनकारी शक्ति का उत्सव मनाने के लिए एक मंच पर एकत्र होंगे।
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