ग्राम्य विकास योजनाओं की समीक्षा, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर
देहरादून, ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम (MSME), खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री भरत सिंह चौधरी ने गुरुवार को ग्राम्य विकास विभाग की योजनाओं एवं उपलब्धियों की समीक्षा की। यमुना कॉलोनी स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विगत वित्तीय वर्ष की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।
बैठक में अधिकारियों ने विभागीय संरचना के अंतर्गत पदोन्नति एवं सीधी भर्ती से संबंधित जानकारी भी मंत्री को दी। साथ ही विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं की प्रगति एवं उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुतीकरण के दौरान अधिकारियों ने एनआरएलएम, ग्रामोत्थान-REAP, मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना, एसआरएलएम, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) सहित विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों की जानकारी दी। बताया गया कि वर्ष 2025-26 में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के अंतर्गत कुल 3.01 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री की गई। वहीं महात्मा गांधी नरेगा योजना में 99.82 प्रतिशत समयबद्ध भुगतान कर उत्तराखंड ने देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत 290.10 करोड़ रुपये तथा जी-राम योजना के लिए 705.25 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
मंत्री भरत सिंह चौधरी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए। उन्होंने KVK कर्मचारियों के कौशल विकास हेतु एक्सपोज़र विजिट आयोजित करने के निर्देश भी दिए, ताकि वे आधुनिक तकनीकों एवं बेहतर कार्यप्रणालियों से परिचित हो सकें।
बैठक में मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में शिष्टाचार भेंट अथवा अन्य आयोजनों में गुलदस्तों के स्थान पर स्थानीय उत्पाद उपहार स्वरूप देने की परंपरा विकसित की जाए, जिससे प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिल सके।
इस अवसर पर सचिव ग्राम्य विकास धीराज सिंह गबरियाल, अपर सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव एवं सीईओ झरना कमठान सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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