दरवाजों पर ताले, गलियों में खामोशी… हर रात गाँव की रखवाली करते हैं ग्राम प्रहरी अमर सिंह –

चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )यात्रा सीजन के दौरान चमोली के घिंघराण गांव के अधिकांश परिवार बद्रीनाथ धाम और अन्य क्षेत्रों में आजीविका के लिए चले गए हैं। गांव में गिने-चुने परिवार ही रह गए हैं। दिन ढलते ही गलियां सुनसान हो जाती हैं, अधिकांश घरों के दरवाजों पर ताले लटक जाते हैं और गांव में सन्नाटा पसर जाता है। लेकिन इसी सन्नाटे के बीच ग्राम प्रहरी अमर सिंह की जिम्मेदारी शुरू होती है।पुलिस द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को अमर सिंह महज नौकरी नहीं, बल्कि अपने गांव और अपनी मिट्टी के प्रति फर्ज मानकर निभा रहे हैं। वह हर रात गांव में गश्त करते हैं, बंद पड़े घरों और आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखते हैं तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस तक पहुंचाने के लिए सजग रहते हैं।गांव के अधिकांश लोग भले ही रोजी-रोटी के लिए बाहर हों, लेकिन उनके घरों की निगरानी के लिए एक अपना व्यक्ति हर रात गांव में मौजूद रहता है। अमर सिंह का कहना है कि उन्हें अपने गांव से जुड़कर काम करना पसंद है और वह अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करते हैं। पढ़े-लिखे अमर सिंह कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर चुके हैं। हालांकि जीवन उन्हें आज ग्राम प्रहरी की जिम्मेदारी तक लेकर आया, लेकिन उन्होंने इस काम को कभी छोटा नहीं समझा। उनका मानना है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसे निभाने की निष्ठा उसे बड़ा बनाती है।थाना प्रभारी नवनीत भण्डारी ने अमर सिंह से बातचीत कर उनके दायित्व और गांव की सुरक्षा को लेकर जानकारी ली। अमर सिंह ने बताया कि वह अपने गांव और अपनी मिट्टी से जुड़े रहना चाहते हैं। उनका सपना है कि गांव में रहकर स्वरोजगार शुरू करें और अपने परिवार के साथ गांव के विकास में भी योगदान दें।रात के सन्नाटे में जब गांव की अधिकांश खिड़कियां अंधेरे में डूबी रहती हैं, तब अमर सिंह की टॉर्च की रोशनी गलियों में दिखाई देती है। उनकी यह गश्त महज रास्तों पर चलना नहीं, बल्कि बाहर गए परिवारों के भरोसे की रखवाली है।पुलिस व्यवस्था में ग्राम प्रहरी की भूमिका भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए यह महत्वपूर्ण कड़ी है। अमर सिंह जैसे ग्राम प्रहरी पुलिस और ग्रामीणों के बीच संपर्क सेतु बनकर अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। अमर सिंह की कहानी बताती है कि सेवा के लिए बड़ी कुर्सी जरूरी नहीं होती। कभी-कभी रात के अंधेरे में हाथ में टॉर्च लेकर गांव की गलियों से गुजरता एक ग्राम प्रहरी भी पूरे गांव के भरोसे की रोशनी बन जाता है।

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