

देहरादून: समान नागरिक संहिता यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) में सरकार ने पहचान पत्र सहित लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को सरल बनाते बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। अब यूसीसी पोर्टल में पंजीकरण के लिए आधार कार्ड के साथ पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस भी मान्य होंगे। इसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया है।
बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता (चतुर्थ संशोधन) नियमावली को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री की हरी झंडी के बाद गृह विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इसके तहत नई नियमावली को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। अधिसूचना के अनुसार नए बदलाव के तहत पहचान के प्रमाण की परिभाषा को विस्तारित किया गया है।
आधार की अनिवार्यता खत्मअब यूसीसी में पहचान का प्रमाण का अर्थ केवल आधार कार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र या राज्य सरकार की ओर से जारी अन्य वैध दस्तावेजों को भी जोड़ दिया गया है। नए संशोधन के तहत, कई नियमों में जहां पहले आधार संख्या या आधार शब्द का उल्लेख था, वहां अब इसे ‘पहचान का प्रमाण’ शब्द से बदल दिया गया है।
विवाह पंजीकरण,उत्तराधिकार में संशोधनविवाह पंजीकरण और विधिक उत्तराधिकारियों की घोषणा के मामलों में उप-निबंधक को पंजीकरणकर्ताओं से अतिरक्ति सूचना मांगने के लिए पांच दिन का समय दिया गया है। इसके अलावा तत्काल के मामलों में यह समय 24 घंटे निर्धारित कर दिया गया है। सचिव गृह विभाग शैलेश बगौली ने कहा कि समान नागरिक संहिता (चतुर्थ संशोधन) नियमावली, उत्तराखंड 2025 को मुख्यमंत्री ने विचलन के माध्यम से मंजूरी दी है। विधिवत संस्तुति के लिए इसे अगली कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा।
अपील के लिए अब मिलेंगे 45 दिनलिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से संबंधित नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। पंजीकरण आवेदन की प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर महानिबंधक नामित अधिकारी से संक्षप्ति जांच करवाएंगे। पंजीकरण आवेदन अस्वीकार होने करने पर निबंधक को आदेश में यह उल्लेख करना होगा कि महानिबंधक के समक्ष 45 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है। पहले यह अवधि 30 दिन थी। लिव इन में पंजीकरण कराने वालों की सुरक्षा की दृष्टि से अन्य बदलाव भी किए गए हैं।
