देहरादून। उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिलों के लिए कथित फर्जी आश्रित प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल का मामला अब सरकारी प्रमाण पत्र जारी करने वाली व्यवस्था तक पहुंच गया है। प्रकरण में देहरादून कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जनाधार (ई-डिस्ट्रिक्ट) केंद्र को फिलहाल बंद कर दिया गया है। केंद्र में तैनात तीनों कर्मचारियों को भी हटा दिया गया है। प्रशासन के इस कदम के बाद प्रमाण पत्र जारी करने और उनके सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच के बीच सरकारी केंद्र पर कार्रवाई
जांच के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित होने के आधार पर कथित फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए जाने और इनके जरिए एमबीबीएस सीटों में लाभ लेने का मामला सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देहरादून के कलेक्ट्रेट स्थित जनाधार केंद्र से भी ऐसे प्रमाण पत्र जारी होने की बात जांच में सामने आई, जिसके बाद केंद्र की कार्यप्रणाली की पड़ताल शुरू हुई।
प्रशासन ने फिलहाल केंद्र का संचालन रोकने और वहां तैनात तीनों कर्मचारियों को हटाने का निर्णय लिया है। जांच पूरी होने के बाद नए कर्मचारियों की तैनाती कर केंद्र दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।
दो पटवारी निलंबित, प्रमाण पत्र भी किए गए निरस्त
इस प्रकरण में देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान पहले ही दो पटवारियों को निलंबित कर चुके हैं। संबंधित कथित फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई भी की गई है।
अब जनाधार केंद्र बंद किए जाने के बाद जांच का दायरा प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन तक पहुंच गया है। हालांकि, केंद्र के कर्मचारियों की व्यक्तिगत भूमिका को लेकर जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
SIT जांच में तय होगी जिम्मेदारी, उठे कई अहम सवाल
एमबीबीएस दाखिलों में कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल की जांच एसआईटी कर रही है। इस प्रकरण में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि प्रमाण पत्र जारी करने के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ, कथित अनियमितता कैसे हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
यदि जांच में प्रमाण पत्र जारी करने या सत्यापन की प्रक्रिया में लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना भी अहम होगा।
जिलाधिकारी ने की केंद्र बंद होने की पुष्टि
देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने जनाधार केंद्र बंद किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है। कर्मचारियों को हटाए जाने के कारण केंद्र को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया में चूक कहां हुई और जांच के बाद किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है। एसआईटी की जांच के नतीजे इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो।
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