देहरादून/रानीपोखरी : राजधानी देहरादून के रानीपोखरी थाना क्षेत्र से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना सामने आई है। थानों के धारकोट रोड पर स्थित जामा मस्जिद को सोमवार को प्रशासन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की टीम द्वारा सील कर दिया गया है। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में किसी भी प्रकार के गतिरोध को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ प्रशासनिक एक्शन
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई नियमों और विकास प्राधिकरण के मानकों के तहत की गई है:
सुरक्षा घेरे में कार्रवाई: सोमवार को एमडीडीए की टीम स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल के साथ धारकोट रोड पहुंची। वहां निर्धारित विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए जामा मस्जिद परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया।
अधिकारियों की मुस्तैदी: कार्रवाई के दौरान पूरे समय प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस के आला अफसर मौके पर डटे रहे, ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में मिश्रित प्रतिक्रियाएं
मस्जिद को सील किए जाने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है, तथा मामले में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं:
मुस्लिम समाज में रोष: इस अचानक हुई प्रशासनिक सीलिंग की कार्रवाई को लेकर मुस्लिम समाज के नागरिकों और स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है।
हिंदूवादी संगठनों ने किया समर्थन: दूसरी ओर, विभिन्न हिंदूवादी संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने एमडीडीए और जिला प्रशासन के इस कदम का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन द्वारा देर से ही सही, लेकिन बिल्कुल उचित और न्यायसंगत कार्रवाई की गई है।
प्रशासन की शांति बनाए रखने की अपील
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और नागरिक प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों से क्षेत्र में हर हाल में शांति, आपसी सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखने की पुरजोर अपील की गई है। इसके साथ ही अफवाहों को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए पूरे रानीपोखरी व थानों क्षेत्र में पुलिस बल द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।
आपकी राय
विकास प्राधिकरणों (MDDA) द्वारा नियमों और मानकों के उल्लंघन पर की जाने वाली ऐसी सीलिंग या ध्वस्तीकरण की प्रशासनिक कार्रवाइयों को आप कानून व्यवस्था और सुशासन के लिहाज से कितना सही मानते हैं?
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