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होम लोन EMI नहीं चुका पा रहे ‘मोहम्मद दीपक’, जिम पर भी संकट के बादल; जानें क्या है कारण – myuttarakhandnews.com

नई दिल्ली: उत्तराखंड के कोटद्वार के रहने वाले मोहम्मद दीपक फिर से चर्चा में हैं। दरअसल दीपक जिस घर में जिम चलाते हैं, उसके मालिक ने उन्हें घर खाली करने को कहा है। एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार को परेशान करने के खिलाफ आवाज़ उठाने पर कई संगठनों से दीपक को धमकी मिली थी। 26 जनवरी को 38 वर्षीय दीपक से कुछ लोगों के समूह का सामना हुआ। ये सभी पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित एक 70 साल के मुस्लिम दुकानदार को परेशान कर रहे थे।
किस बात को लेकर हुआ था विवाद?
समूह की मांग थी कि बुज़ुर्ग आदमी अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटा दे। जब दीपक ने बीच-बचाव किया, तो लोगों ने उनसे उनका नाम पूछा, जिस पर उन्होंने जवाब दिया, ‘मोहम्मद दीपक’। इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया, जिससे दीपक लाइमलाइट में आ गए। 31 जनवरी को बजरंग दल के कई सदस्य दीपक का सामना करने के लिए इकट्ठा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इन घटनाओं के बाद खबरें आईं कि कई लोगों ने दीपक के जिम में आना बंद कर दिया था।
जिम की मेंबरशिप 150 से घटकर सिर्फ़ 15 रह गई थी। इसके बाद कानूनी लोगों समेत कई लोगों ने मोहम्मद दीपक के पीछे खड़ा होने की कोशिश की। आखिरकार उन्होंने कहा कि मेंबरशिप फिर से बढ़कर लगभग 70 लोग रोज़ाना हो गई। हालांकि सामाजिक बहिष्कार और सांप्रदायिक गुस्से से पैदा हुए ‘आर्थिक बॉयकॉट’ का काफ़ी असर हुआ, जिससे दीपक उस जगह का 40,000 रुपये महीने का किराया नहीं दे पा रहे हैं, जहां वह जिम चलाते हैं। दीपक द्वारा घर बनाने के लिए लिए गए लोन की किश्तों पर भी असर पड़ा है।
घर का किराया नहीं दे पा रहे दीपक
दीपक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जिस बिल्डिंग में उनका जिम है, उसके मालिक ने चार महीने से किराया न देने पर उन्हें खाली करने को कहा है। दीपक ने कहा, “मैं रेगुलर किराया नहीं दे पा रहा था। हालांकि, चीजें बेहतर होती दिख रही थीं क्योंकि हर दिन लगभग 70 लोग आने लगे थे। मकान मालिक ने इशारा किया कि वह मुझे इसे किराए पर नहीं देना चाहता क्योंकि मैं मुसलमानों के लिए खड़ा हुआ’।”
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के एक ग्रुप ने जिम के लिए सालाना मेंबरशिप फीस देने की पेशकश करके उसकी मदद की थी। इसपर दीपक ने कहा कि जिम को चालू रखने के लिए और पैसे की ज़रूरत थी। दीपक ने कहा, “जब मेंबरशिप ड्राइव एक्टिव थी, तो मैंने उस पैसे का इस्तेमाल EMI और अपने बच्चे की फीस के लिए किया, और मैं रेगुलर किराया नहीं दे पा रहा था। अब उसने मुझे घर से निकालने की धमकी दी है।”
मार्च में दीपक ने अपने खिलाफ FIR रद्द करने की मांग करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका का निपटारा कर दिया कि यह एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए ज़रूरी है।

Nandni sharma

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