Uttarakhand Weather 28 September: उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर अपने तल्ख तेवर दिखा रहा है. शुक्रवार रात से शुरू हुआ झमाझम बारिश का दौर रविवार को भी दिनभर जारी रहा. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, कई संपर्क मार्गों पर मलबा और बोल्डर आने से आवाजाही बाधित हुई है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं. मौसम विभाग के अनुसार 28 सितंबर को उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून जिलों में कहीं-कहीं मूसलाधार बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा गढ़वाल क्षेत्र के जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली और तीव्र से बहुत तीव्र बारिश का दौर देखने को मिल सकता है. वहीं, पर्वतीय जिलों के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं, जबकि मैदानी जिलों जैसे हरिद्वार और उधमसिंह नगर में भी कुछ जगहों पर तेज पानी गिर सकता है. चमोली और उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी होने से मौसम और सर्द हो गया है.
मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा बुलेटिन के अनुसार, गढ़वाल मंडल के जनपदों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बादलों के तीव्र से अति तीव्र दौर चलने की कड़ी चेतावनी जारी की गई है. बीते 24 से 48 घंटों में प्रदेशभर में अत्यंत सक्रिय मानसूनी गतिविधियां दर्ज की गई हैं. चंपावत में सबसे ज्यादा 160 मिलीमीटर, काशीपुर में 133 मिलीमीटर, उधमसिंह नगर में 120 मिलीमीटर, लैंसडाउन में 112 मिलीमीटर और नैनीताल में करीब 107 मिलीमीटर बारिश मापी गई है. इस भीषण बारिश ने राज्य के नदी-नालों को खतरे के निशान के करीब ला दिया है और प्रमुख सड़कों पर मलबा गिरने से यातायात बुरी तरह चरमरा गया है. पर्वतीय हिस्सों में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कई नेशनल हाईवे और संपर्क मार्ग बंद पड़े हैं, जिससे स्थानीय आबादी के साथ-साथ तीर्थयात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं.
देहरादून और हरिद्वार: मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और भारी बारिश की मारराजधानी देहरादून में सुबह से ही रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी है, जिसके चलते सड़कों पर पानी भर गया है. पास के मशहूर पर्यटन स्थल चकराता में लगातार पानी गिरने और सर्द हवाएं चलने के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दिन में ही लोगों को गर्म कपड़े निकालने पड़ गए हैं. मौसम विभाग ने 28 सितंबर को देहरादून के साथ-साथ हरिद्वार जिले में भी तीव्र बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई है. हरिद्वार के कई निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है, जबकि प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की हिदायत दी है.
उत्तरकाशी और चारधाम रूट: गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर बार-बार भूस्खलनसीमांत जनपद उत्तरकाशी में बीते दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने यात्रा मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है. गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह से भारी मलबा और बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं. हाईवे को बार-बार बंद करना पड़ रहा है और मशीनरी की मदद से मलबा हटाकर इसे सुचारू करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है. उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले शिखरों पर हल्की बर्फबारी होने के कारण तापमान सामान्य से काफी नीचे आ गया है. मौसम विभाग ने उत्तरकाशी के लिए 28 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी बरकरार रखी है.
ऋषिकेश और श्रीनगर: अलकनंदा-गंगा का रौद्र रूप, त्रिवेणी घाट जलमग्नपहाड़ी जनपदों में लगातार हो रही तेज बारिश का सीधा असर श्रीनगर और ऋषिकेश की नदियों पर दिखने लगा है. श्रीनगर जलविद्युत परियोजना के डैम में पानी की भारी आवक के कारण बांध के गेट खोलकर पानी डिस्चार्ज करना पड़ा है. इस अतिरिक्त पानी के कारण मैदानी हिस्से में आते ही गंगा नदी फिर से उफान पर पहुंच गई है. ऋषिकेश के सुप्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर गंगा का जलस्तर इतना बढ़ गया कि वहां होने वाला नियमित आरती स्थल जलमग्न हो गया. सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस-प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है और श्रद्धालुओं व तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चेतावनी जारी कर नदी के किनारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने को कहा है.
नैनीताल और अल्मोड़ा: बंद पड़े राष्ट्रीय राजमार्ग, जाम में फंसे मुसाफिरकुमाऊं मंडल के सरोवर नगरी नैनीताल में बीते 48 घंटों से नॉन-स्टॉप बारिश से हाल बेहाल है. नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर ज्योलीकोट के पास अचानक पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा मुख्य मार्ग पर आ गिरा. इसके चलते सड़क के दोनों ओर गाड़ियों का लंबा रेला लग गया और कई घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा. वहीं अल्मोड़ा जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश के चलते क्वारब के पास बार-बार लैंडस्लाइड हो रहा है. जिले की आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण सड़कें मलबे की चपेट में आकर बंद हो चुकी हैं, जिससे सैकड़ों गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालयों से कट गया है.
बागेश्वर और चंपावत: नेशनल हाईवे-109 बाधित, बीआरओ की टीमें जुटींबागेश्वर जिले में बीते दो दिनों से जारी बारिश के कारण गरुड़-बागेश्वर नेशनल हाईवे-109 पर आवाजाही पूरी तरह रुक गई है. रवाईखाल के समीप पहाड़ी से भारी बोल्डर और कीचड़ सड़क पर आने से मार्ग बंद हो गया है. सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें बुलडोजर लेकर रास्ता खोलने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है. जिले में कुल तीन मुख्य सड़कें बंद हैं, जिसके चलते गरुड़ क्षेत्र से जिला मुख्यालय आने-जाने वाले लोगों को भारी संकट झेलना पड़ रहा है. उधर चंपावत में पिछले 24 घंटे के दौरान सर्वाधिक 160 एमएम बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं.
आगे कैसा रहेगा मौसम? 29 सितंबर से राहत के आसार29 सितंबर: उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज हो सकती है, जबकि बाकी जिलों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहेगा.
30 सितंबर: पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि हरिद्वार और उधमसिंह नगर में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाएगा.
1 से 3 अक्टूबर: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ ऊंचे इलाकों को छोड़कर राज्य के अधिकांश मैदानी और मध्यम पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम साफ और शुष्क रहने की उम्मीद है, जिससे लोगों को जलभराव और भूस्खलन की विभीषिका से बड़ी राहत मिलेगी.
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