नाबार्ड ने 28 नए उत्पादों को दिलाया जीआई पंजीकरण, 13 हजार से अधिक कारीगरों को मिला लाभ –

 
176 उत्पादों को जीआई टैग दिलाने में निभाई अहम भूमिका, 50 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित
देहरादून, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर के 28 नए पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही नाबार्ड अब तक 176 उत्पादों को जीआई पंजीकरण दिलाने में सहयोग कर चुका है, जबकि 538 जीआई उत्पादों के संवर्धन के लिए विभिन्न संस्थाओं और भागीदारों के साथ कार्य कर रहा है।
नए जीआई पंजीकरण प्राप्त उत्पादों में बिहार की नालंदा बावनबूटी साड़ी, गया पत्थरकट्टी शिल्प, झारखंड की कुचाई सिल्क साड़ी, असम का बांस शिल्प और बिहू पेपा, हिमाचल प्रदेश की वुड कार्विंग तथा मध्य प्रदेश का खजुराहो धातु शिल्प सहित देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उन्हें कानूनी संरक्षण के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान और बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि जीआई पंजीकरण पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय पहचान को संरक्षित करने के साथ ग्रामीण उत्पादकों के लिए मूल्य संवर्धन का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड उत्पादकों के संगठन, कौशल विकास, ब्रांडिंग, विपणन, निर्यात और उद्यम विकास के माध्यम से जीआई आधारित मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नाबार्ड की जीआई आधारित पहलों से अब तक 13 हजार से अधिक कारीगर और उत्पादक जुड़ चुके हैं, जिन्हें उच्च मूल्य वाले घरेलू बाजारों तक पहुंच मिली है। वहीं, इन पहलों के माध्यम से 50 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित हुए हैं।
वर्तमान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और गुजरात में विभिन्न जीआई उत्पादों के उत्पादन एवं संवर्धन के लिए 14 ग्रामीण उद्यम उत्पादक संगठन (आरईपीओ) कार्यरत हैं। इसके अलावा नाबार्ड ने उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) अहमदाबाद, बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा मदुरै एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन फोरम में जीआई सुविधा केंद्र स्थापित करने में भी सहयोग दिया है। ये केंद्र जीआई पंजीकरण से लेकर उत्पादों के संरक्षण, ब्रांडिंग, विपणन और व्यावसायीकरण तक संपूर्ण सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
नाबार्ड ने कर्नाटक के ऐहोल में जीआई स्टोर की स्थापना में भी सहयोग दिया है, जहां जीआई प्रमाणित उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन की विशेष व्यवस्था की गई है। संस्था का उद्देश्य ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, डिजिटल वाणिज्य और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों को प्रीमियम मूल्य दिलाना तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना है।

pooja Singh

Share
Published by
pooja Singh

Recent Posts

काबिना मंत्री खजानदास ने किया मन्नुगंज एवं रिस्पना का भ्रमण

देहरादून : लगातार हो रही बरसात के दौरान नदी किनारे रह रहे लोगों की सुरक्षा…

7 minutes ago

उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत ने नवनियुक्त केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी से की मुलाकात

459 करोड़ से एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में अनुसंधान संरचना होगी सुदृढ- रावत  एनआईटी श्रीनगर के…

28 minutes ago

कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे- जिलाधिकारी

जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी ने सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग बूथों का निरीक्षण कर एसआईआर आपत्ति…

2 hours ago

उत्तराखंड में कुदरत का कहर: उफान पर गंगा और अलकनंदा, 132 सड़कें बंद, 5 जिलों में येलो अलर्ट जारी

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की प्रचंड बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।…

2 hours ago

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित हुई वन भूमि हस्तांतरण की बैठक

जिलाधिकारी ने लंबित प्रकरणों में तेजी, समयबद्ध फॉलोअप और विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के दिए…

2 hours ago