

राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर उत्तराखंड परिवहन विभाग एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. हिमाचल की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी ‘ग्रीन सेस’ वसूला जाएगा. खास बात यह है कि यह सेस अब सिर्फ कमर्शियल गाड़ियों पर नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाली निजी गाड़ियों पर भी लागू होगा.
परिवहन विभाग ने इसके लिए एक निजी कंपनी से करार किया है. पूरे राज्य में 15 ऑटोमैटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं जो गाड़ियों की पहचान करेंगे. जैसे ही कोई बाहरी वाहन राज्य में प्रवेश करेगा, उसका फास्टैग स्कैन कर लिया जाएगा और ग्रीन सेस की राशि स्वचालित रूप से कट जाएगी.
क्या है ग्रीन सेस? कैसे होगा लागू?आरटीओ देहरादून संदीप सैनी ने बताया कि यह ग्रीन सेस राज्य में प्रवेश करते ही लागू हो जाएगा और इसकी वैधता 24 घंटे होगी. ग्रीन सेस से होने वाली कमाई को प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और शहरी परिवहन के सुधार में इस्तेमाल किया जाएगा.
ग्रीन सेस की दरें (Rate Chart)वाहन का प्रकार ग्रीन सेस राशिदोपहिया, इलेक्ट्रिक और CNG वाहन छूटथ्री व्हीलर 20 रुपएकार 40 रुपएमीडियम कमर्शियल वाहन 60 रुपएहैवी कमर्शियल वाहन 80 रुपएएंबुलेंस, फायर ब्रिगेड छूटमहत्वपूर्ण बातें:– फास्टैग के जरिए ही सेस की वसूली होगी.– यह टैक्स केवल 24 घंटे के लिए वैध होगा.– एंबुलेंस, अग्निशमन और ग्रीन फ्यूल वाहनों को छूट मिलेगी.– निजी गाड़ियों से पहली बार वसूली की जा रही है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?विजय वर्धन डंडरियाल, ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ का कहना है, ‘ग्रीन सेस का मकसद अच्छा है, लेकिन पहले से वसूले जा रहे एंट्री सेस के पैसे का उपयोग कितना पारदर्शी है, यह भी जनता को बताया जाना चाहिए.’
क्या है धामी सरकार की मंशाधामी सरकार का उद्देश्य राज्य की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को सुधारना और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है. ग्रीन सेस वसूल का नियाम नवंबर से प्रदेश में लागू होने की संभावना है, जिससे हर बाहरी वाहन को उत्तराखंड की सीमा में घुसते ही टैक्स देना होगा.
