स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नगर निगम में गूंजा देशभक्ति और उत्तराखंड की संस्कृति का स्वर –

 
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संस्कृति निदेशालय एवं नगर निगम देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में कवियों ने देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। वीर रस, हास्य, श्रृंगार और गीतों के साथ उत्तराखंड की लोकभाषाओं और संस्कृति की झलक भी काव्य पाठ में देखने को मिली।
 
स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को नगर निगम परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन में पहली बार संस्कृति निदेशालय और नगर निगम ने संयुक्त रूप से इस तरह के कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद करने और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष से परिचित कराने का दिन है। साहित्य और कविता समाज में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना जगाने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
 
इसके पश्चात कवि गौरव चौहान, विनीत चौहान, डॉ. शिखा दीप्ति, डॉ. राजीव राज, डॉ. अनिल चौबे, सुनीता चौहान, हेमंत बिष्ट, हेमवती नंदन भट्ट, मोहन बिष्ट ‘मुंतज़िर’, भूपेंद्र बसेड़ा और श्रीकांत शर्मा ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और यहां के जनजीवन को बेहद खूबसूरत अंदाज में सामने रखा। वहीं, उत्तराखंड की विभिन्न जातियों और सामाजिक परिस्थितियों को भी कवियों ने व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिस पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।
 
कवियों की प्रस्तुतियों में देश के प्रति प्रेम और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की भावना के साथ ही उत्तराखंड की मिट्टी, पहाड़, लोकभाषा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की झलक देखने को मिली। जौनसारी, कुमाउनी और गढ़वाली भाषा में प्रस्तुत रचनाओं ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।
 
इस अवसर पर मेयर सौरभ थपलियाल ने कहा हमारे लिए यह गौरव का विषय है कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संस्कृति निदेशालय के साथ मिलकर पहली बार इस प्रकार के भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, लोकभाषाओं और परंपराओं को मंच देने वाले ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाने चाहिए।
 
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह कार्यक्रम देशभक्ति के साथ-साथ उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर है। नगर निगम की ओर से सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
 
संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत ने कहा कि संस्कृति निदेशालय का उद्देश्य प्रदेश की लोकभाषाओं, लोककला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। कवि सम्मेलन में देशभक्ति के साथ उत्तराखंड की लोकभाषाओं और संस्कृति को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, वह प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, संस्कृति से जुड़े लोग, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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