देहरादून: उत्तराखंड में गैस संकट के कारण उद्योगों की किचन और कैंटीन पर असर पड़ा है। गैस नहीं मिलने के कारण उद्योगों में किचन में कर्मचारियों के लिए खाना बनाना बंद कर दिया है। इसके कारण उद्योगों में कर्मचारियों को कैंटीन में खाना नहीं मिल पा रहा है। दो से तीन दिन गैस की किल्लत रही तो गैस संकट के कारण कुछ उद्योगों में उत्पादन पर असर पड़ सकता है। हरिद्वार के सिडकुल में वर्धमान, पुराना औद्योगिक क्षेत्र, आईपी टू, आईपी फोर और बहादराबाद इंडस्ट्रियल एरिया में छोटे बड़े 1800 उद्योग स्थापित हैं। इन उद्योगों की किचन और कैंटीन ईंधन के लिए गैस पर निर्भर है। इनमें केवल 40 उद्योगों में पीएनजी गैस सप्लाई होती है।
सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग, महामंत्री राज अरोड़ा ने बताया कि उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सभी 1800 उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित है। बताया कि जो उद्योग बाइक निर्माण करता है। उस निर्माता उद्योग के कई एलायंस उद्योग उत्पादन के लिए गैस पर निर्भर है। गैस नहीं मिलने से इन एलायंस उद्योग में बाइक के पार्ट्स का उत्पादन बंद हो जाएगा। तो बाइक का उत्पादन भी रुक जाएगा।
आरएम सिडकुल कमल किशोर ने बताया कि सिडकुल के 12 सेक्टर में 750 उद्योगों में करीब 10 लाख कर्मचारी काम करते है। बता दें कि सभी औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 20 लाख कर्मचारी कार्यरत है। एक दो दिन में गैस नहीं मिलने से उद्योगों में बंदी का संकट बन सकता है। दून के सेलाकुई में 110 औद्योगिक इकाइयों में एलपीजी सिलेंडर का उपयोग होता है, जिनमें परफ्यूम, फार्मा के साथ ही खाद्य पदार्थ बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं। फार्मा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद कलानी ने बताया कि एलपीजी सिलेंडर के विकल्प के तौर पर डीजल भट्ठी का उपयोग किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल वेलफियर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील उनियाल ने बताया कि अधिकांश औद्योगिक इकाइयों में पहले से ही एलपीजी सिलेंडर के विकल्प मौजूद हैं।
दून मेडिकल कॉलेज में लकड़ी पर बन रहा खानादेहरादून। गैस संकट की आंच दून मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गई है। यहां सिलेंडर खत्म होने से लकड़ी पर खाना बनना शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज परिसर में करीब 400 एमबीबीएस छात्र मेस से खाना खाते हैं। शुक्रवार को छात्रों को सुबह नाश्ते में पोहा, ब्रेड दिया गया जबकि पहले पराठे दिए जाते थे। दिन में राजमा-चावल दिया गया। मेडिकल कॉलेज में हर महीने 120 सिलेंडर लगते हैं। गुरुवार रात से गैस खत्म हो गई है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन की ओर से एजेंसी को पत्राचार किया गया है कि सप्लाई सुचारु की जाए। दून अस्पताल में शुक्रवार को एजेंसी ने छह सिलेंडर उपलब्ध कराए।
कंपनियों में भविष्य में हो सकती हैं दिक्कतेंसितारगंज क्षेत्र में करीब 12 संस्थान ईंधन के लिए गैस पर निर्भर हैं। इनमें पारले बिस्कुट, क्राकरी, उपकरण बनाने वाली कंपनियां प्रमुख हैं। गैस से यहां हीट किया जाता है। अगले दो दिन में गैस आपूर्ति नहीं होने से प्लांट के गैस से संबंधित मशीनें बंद हो जाएंगी। क्राकरी बनाने वाली कंपनी लाओपाला के दो प्लाटों में उत्पादन पूरी तरह से बंद हो सकता है।
कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध का असर सात दिन और रहा तो कई फैक्ट्रियों में बंदी के आसार हैं। विदेशों से आयातित रॉ मटेरियल, केमिकल और पीएनजी की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। उद्यमियों ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों में पहले भी रोक लग गई है। इससे फैक्ट्रियों में परेशानी बढ़ जाएगी।
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