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उत्तराखंड-हिमाचल के 6 शहरों की एक तिहाई इमारतें उच्च जोखिम वाली, इस स्टडी में हुआ खुलासा – myuttarakhandnews.com

रुड़की । उत्तराखंड के कर्णप्रयाग, नैनीताल, मसूरी और हिमाचल प्रदेश के कंडाघाट, ददाहू, पावंटा साहिब में एक तिहाई से अधिक इमारतें संरचनात्मक अभियांत्रिकी (स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग) के मानकों पर खरी नहीं हैं। इनको भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है। इस कारण ये इमारतें उच्च जोखिम वाली श्रेणी में हैं, जिनके भूकंपीय घटनाओं के दौरान ढहने या भारी क्षति की आशंका रहती है।
इन संरचनाओं में अस्पताल, स्कूल और प्रशासनिक कार्यालय भी चल रहे हैं। यह बात केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की के अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन की रिपोर्ट गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी गई है।
सीबीआरआइ रुड़की के संरचना अभियांत्रिकी प्रभाग के मुख्य विज्ञानी व इस परियोजना के प्रोजेक्ट लीडर डा. अजय चौरसिया ने बताया कि जुलाई 2024 से मार्च 2025 के मध्य यह अध्ययन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य भूकंपीय खतरों का मूल्यांकन, इमारतों की भेद्यता का आकलन, संभावित मानवीय एवं आर्थिक नुकसान का अनुमान, भविष्य के जोखिम न्यूनीकरण और शहरी नियोजन रणनीतियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करना था। डा. चौरसिया के अनुसार, चिह्नित क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन मानचित्र तैयार करने के लिए एक व्यापक पद्धति विकसित की गई है। संस्थान के छह-सात विज्ञानी और 40 प्रोजेक्ट असिस्टेंट की टीम ने प्रत्येक शहर में 1,000 इमारतों पर यह अध्ययन किया। 4,978 इमारतों में से अधिकांश को तत्काल पुनर्निर्माण की आवश्यकता डा. अजय चौरसिया ने बताया कि अध्ययन में शामिल शहर भूकंपीय क्षेत्र चार व पांच में आते हैं। ये शहर तीव्र भू-गति के प्रति संवेदनशील हैं। ये खड़ी ढलानों, अनियमित विकास और संरचनात्मक अभियांत्रिकी की अनदेखी के कारण अधिक जोखिम भरे हैं। इन छह शहरों में 4,978 इमारतें चिह्नित की गई हैं, जिनमें अप्रबलित चिनाई (यूआरएम) है। इन्हें तत्काल पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। इन इमारतों में 37,822 लोग रहते हैं। रिपोर्ट में दिए गए सुझाव – प्राथमिकता आधारित संरचनात्मक रेट्रोफिटिंग कार्यक्रम – आपातकालीन निकासी और प्रतिक्रिया प्रोटोकाल – वास्तविक समय भूकंपीय निगरानी प्रणालियां – सभी नए निर्माणों के लिए अनिवार्य भवन कोड अनुपालन लागू करना – संवेदनशील संरचनाओं विशेष रूप से सार्वजनिक और संस्थागत भवनों के रेट्रोफिटिंग को मिले प्राथमिकता – नगरपालिका नियोजन और जोनिंग विनियमों में जोखिम संवेदनशीलता मानचित्रों को एकीकृत करना – आपदा-प्रतिरोधी केंद्रों में बुनियादी ढांचे का उन्नयन। साथ ही पहुंच, क्षमता और संरचनात्मक मजबूती जरूरी – लचीली निर्माण प्रथाओं और आपदा तैयारियों पर सामुदायिक जागरूकता और प्रशिक्षण

Nandni sharma

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Nandni sharma

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