उत्तराखंड में बीजेपी विधायक अरविंद पांडे के घर प्रस्तावित बैठक रद्द, केंद्रीय नेतृत्व का हस्तक्षेप – पर्वतजन

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के हालिया बयानों और उन पर लगे अतिक्रमण के नोटिस ने तनाव पैदा कर दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके साथ बैठक का कार्यक्रम बनाया गया था, लेकिन अब यह रद्द हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक गदरपुर नहीं जा रहे हैं।
 
पहले यह तय था कि बुधवार दोपहर करीब एक बजे तीनों नेता हेलीकॉप्टर से हरिद्वार से गदरपुर रवाना होंगे और अरविंद पांडे के आवास पर चर्चा करेंगे। जैसे ही इस योजना की जानकारी सोशल मीडिया पर फैली, राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं। कुछ लोगों का मानना था कि पांडे द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य मुद्दों पर दिए गए बयानों से उत्पन्न असंतोष को दूर करने के लिए यह बैठक हो रही थी।

 
हालांकि, अब सूत्रों ने बताया कि कल के घटनाक्रम के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। तीनों नेता हरिद्वार में ही रहेंगे।
 
पृष्ठभूमि में क्या है विवाद?
 
गदरपुर से विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे पिछले कुछ दिनों से काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में सक्रिय हैं। उन्होंने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। इसी के बाद जिला प्रशासन ने उनके आवास पर बने कथित कैंप कार्यालय को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए नोटिस जारी किया। नोटिस में 15 दिनों के अंदर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
 
इस नोटिस के बाद राज्य में सियासी माहौल गरमाया। अरविंद पांडे ने कहा है कि वे बिना किसी डर के अपनी बात रखते रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई उनकी जांच की मांग के विरोध में की जा रही है।
 
अरविंद पांडे का राजनीतिक सफर
 
अरविंद पांडे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और 20 मई 1971 को जन्मे हैं। वे उधम सिंह नगर जिले की गदरपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। अपनी वेबसाइट के अनुसार, 1997 में वे बाजपुर नगर पालिका के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने थे।
 
वर्तमान घटनाक्रम से उत्तराखंड बीजेपी में आंतरिक समन्वय की कोशिशें दिख रही हैं, लेकिन केंद्रीय स्तर पर स्थिति को संभालने का प्रयास किया जा रहा है। आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Sapna Rani

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