देहरादून। लक्ष्मण चौक स्थित हिंदू नेशनल स्कूल में आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में आयोजित त्रिदिवसीय दीक्षा दिवस महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव के अंतर्गत रत्नत्रयी आराधना सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माताजी के दर्शन, प्रवचन और आशीर्वचन का लाभ अर्जित किया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः मंगल प्रस्थान के साथ हुआ। इसके पश्चात अभिषेक, शांतिधारा, जिनेंद्र महाअर्चना, नेमिनाथ प्रभु एवं गुरु पूजन विधि-विधान से संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, कैंट विधायक सविता कपूर तथा विशिष्ट अतिथि विशाल गुप्ता और मगन लाल पुंडीर मौजूद रहे।‘नेमिकुमार : राग से वैराग्य की ओर’ ने किया भावविभोरसमारोह का प्रमुख आकर्षण ‘नेमिकुमार : राग से वैराग्य की ओर’ नाटिका रही। बाल कलाकारों एवं उनके माता-पिता समेत अन्य कलाकारों ने भगवान नेमिनाथ के जीवन में राग से वैराग्य की ओर हुए आध्यात्मिक परिवर्तन का भावपूर्ण मंचन किया। नाटिका ने श्रद्धालुओं को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।तीनों दिन श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था कावेरी ज्वैलर्स परिवार की ओर से की गई।इसके बाद भव्य दीक्षा दिवस समारोह आयोजित हुआ। ‘गुरु समर्पण गौरव गाथा’ नामक विशेष प्रस्तुति दृष्टि पब्लिक स्कूल, सनावद (मध्य प्रदेश) के बच्चों ने प्रस्तुत की। प्रस्तुति पूर्णमति माताजी के जीवन, साधना और आध्यात्मिक व्यक्तित्व पर केंद्रित रही, जिसे श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर सराहा।श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति की ओर से बाहर से आए गणमान्य अतिथियों का माताजी के आशीर्वाद स्वरूप स्मृति-चिह्न, शास्त्र एवं अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन ऋतु दीदी ने किया।दीक्षा दिवस महोत्सव में विकासनगर, ऋषिकेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, झारखंड, सहारनपुर, रुड़की, हरिद्वार, मेरठ और मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे आयोजन में भक्तिभाव, अनुशासन और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।गुरु जीवन को देते हैं सही दिशा : पूर्णमति माताजीमंगल आशीर्वचन में आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना आवश्यक है। गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन को सार्थक और सुंदर ढंग से जीने की कला भी सिखाते हैं। माता-पिता जीवन प्रदान करते हैं, जबकि गुरु उस जीवन को सही दिशा देकर आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।उन्होंने कहा कि गुरु सत्य, अहिंसा और आंतरिक शांति का मार्ग दिखाते हैं। जैन धर्म के प्रवचनों का मूल सार आत्मा को जानना, कर्मों का क्षय करना और संयमपूर्ण जीवन जीना है। वास्तविक सुख बाहरी भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि शांत मन और पवित्र आत्मा में निहित है।माताजी ने श्रद्धालुओं से ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत को जीवन में आत्मसात करने तथा मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाने का आह्वान किया।पार्श्वनाथ मंदिर में निर्वाण कल्याणक महोत्सव शुरूइसी क्रम में जैन मिलन पारस के तत्वावधान में झंडा बाजार स्थित 167 वर्ष प्राचीन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दो दिवसीय निर्वाण कल्याणक महोत्सव का शुभारंभ 18 अगस्त को हुआ। प्रथम दिन शाम सात बजे 501 दीपों से संगीतमय एवं मनोहारी श्रीजी भगवान की महाआरती की गई। इसके पश्चात भक्तिमय भजन संध्या हुई, जिसमें श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए।इस अवसर पर जैन समाज के चेयरमैन राजीव जैन, समाज अध्यक्ष विनोद जैन, अमित जैन (प्राप्ति मेडिकल), श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति के सदस्य, सकल दिगंबर जैन समाज देहरादून के पदाधिकारी एवं सदस्य, महिला मंडल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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