देहरादून। उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग से लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ सामने आए मामलों तक, महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सल्ट, चंपावत, उत्तरकाशी, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जैसे क्षेत्रों में सामने आए मामलों का उल्लेख करते हुए विपक्ष सरकार से पूछ रहा है कि आखिर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।विपक्ष का कहना है कि महिला सुरक्षा केवल नारों, विज्ञापनों और सरकारी दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम, पीड़ित परिवारों को न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उसकी नीति और कार्ययोजना क्या है। ‘बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों की सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब महिलाओं को सुरक्षित माहौल और न्याय पाने का भरोसा मिले।रेखा आर्य के आरोपों ने खड़े किए सवालउत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की ओर से अपने पति गिरधारी लाल साहू पर प्रताड़ना और अपनी तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर जताई गई आशंकाओं ने इस मुद्दे को नया राजनीतिक आयाम दिया है। मंत्री की ओर से साझा किए गए ऑडियो को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की सत्यता जांच का विषय है, लेकिन मामले ने महिला सुरक्षा और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार से सवाल किया जा रहा है कि जब मंत्रिमंडल में शामिल एक महिला सदस्य ही अपनी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जाहिर कर रही हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है? सरकार की जिम्मेदारी है कि मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई हो।महिलाओं के सम्मान पर दोहरे मापदंड क्यों?गिरधारी लाल साहू की बिहार की लड़कियों को पैसे देकर खरीदने संबंधी कथित टिप्पणी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। महिलाओं को खरीद-फरोख्त की वस्तु समझने वाली सोच सामाजिक गरिमा और महिला सम्मान के सिद्धांतों के विपरीत है। इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक दलों और महिला अधिकारों के पक्षधर लोगों की ओर से जवाबदेही की मांग की जा रही है।राजनीतिक सवाल यह भी है कि महिला सम्मान की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को अपने निकटवर्ती लोगों से जुड़े विवादों पर भी समान रूप से जवाबदेह होना चाहिए। किसी व्यक्ति का राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव कानून के समक्ष जवाबदेही में बाधा नहीं बनना चाहिए। हालांकि, किसी भी आरोप पर निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़ा न्याय का सवालअंकिता भंडारी प्रकरण उत्तराखंड में महिला सुरक्षा और न्याय की मांग से जुड़ा एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। इस मामले का उल्लेख करते हुए विपक्ष सरकार से पूछ रहा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के क्या प्रयास किए जा रहे हैं।महिलाओं की सुरक्षा किसी एक राजनीतिक दल या सरकार का विषय नहीं, बल्कि राज्य की संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में पीड़ितों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना, निष्पक्ष जांच कराना, साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कानून के दायरे में लाना और पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता देना प्राथमिकता होनी चाहिए।सरकार से जवाबदेही की मांगविपक्ष ने सरकार से मांग की है कि रेखा आर्य प्रकरण में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, उनकी और उनके बच्चों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर तत्काल ध्यान दिया जाए तथा जांच की प्रगति के बारे में उचित जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही, प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही केवल बयानों से तय नहीं होगी। इसके लिए पारदर्शी कार्रवाई, कानून का निष्पक्ष पालन और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना आवश्यक है। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग हो या किसी अन्य महिला की सुरक्षा का प्रश्न, हर मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठ रही आवाजों का जवाब ठोस कदमों से देना ही सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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