उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल, पिथौरागढ़ से कोटद्वार तक विवादों की कड़ी – पर्वतजन

उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली को लेकर उठने वाले सवाल कोई नए नहीं हैं। समय-समय पर पुलिस की कथित मनमानी और नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं, जिनका असर आम जनता के भरोसे पर साफ दिखाई देता है। हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर पुलिस विभाग की जवाबदेही और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।पिथौरागढ़ नग्न मारपीट मामला, पूर्व एसपी दोषी घोषितपिथौरागढ़ में लक्ष्मी दत्त जोशी के साथ कथित नग्न मारपीट के मामले में पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने जांच के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह को दोषी माना है। यह मामला पहले ही राज्य स्तर पर चर्चा में रहा और अब फैसले के बाद पुलिस प्रशासन की छवि को गहरा झटका लगा है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से पूर्व एसपी की कानूनी और प्रशासनिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।कोटद्वार पत्रकार प्रकरण, शिकायत पर शुरू हुई सुनवाईइसी बीच कोटद्वार से जुड़े एक अन्य मामले ने भी पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया। पत्रकार सुभांशु थपलियाल की गिरफ्तारी के बाद मामला तूल पकड़ गया। पत्रकार ने पौड़ी के पूर्व एसपी लोकेश्वर सिंह, चंद्रमोहन सिंह, इंस्पेक्टर रमेश तनवर सहित कुल सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ पुलिस शिकायत प्राधिकरण, देहरादून में शिकायत दर्ज कराई थी।प्राधिकरण ने शिकायत में प्रस्तुत तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सुनवाई शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में भी जल्द निर्णय आने की संभावना है।हिट एंड रन मामला, आरोपी से पहले पत्रकार पर कार्रवाई
कोटद्वार में जनवरी 2025 का एक हिट एंड रन मामला भी पुलिस की भूमिका को लेकर सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, एक कार की टक्कर से युवती अंजली की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चालक घटना के बाद फरार हो गया। बारह दिन बीतने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर मृतका की मां ने पत्रकार सुभांशु थपलियाल से मदद की अपील की।पत्रकार द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किए जाने के बाद पुलिस सक्रिय तो हुई, लेकिन कार्रवाई आरोपी की बजाय पत्रकार के खिलाफ की गई। देर रात पुलिसकर्मी पत्रकार के घर पहुंचे और उन्हें थाने ले जाया गया। मानहानि सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पूरी रात उन्हें लॉकअप में रखा गया, जिससे पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो गए।
पूर्व एसपी लोकेश्वर सिंह पर बढ़ता दबावपिथौरागढ़ के गंभीर मामले में दोषी ठहराए जाने और कोटद्वार से जुड़े विवादों के चलते पूर्व एसपी लोकेश्वर सिंह लगातार चर्चा के केंद्र में हैं। आम जनमानस और सामाजिक संगठनों का कहना है कि एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने उनकी भूमिका को संदेह के दायरे में ला खड़ा किया है।

पुलिस की साख पर गहरा असरइन तमाम घटनाओं ने उत्तराखंड पुलिस की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई होगी या फिर ये मामले भी कागजी प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाएंगे। जनता की नजर अब प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

Sapna Rani

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