केदारनाथ। केदारनाथ धाम की रूप छड़ी और मुकुट के कथित रूप से गायब होने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच उत्तराखंड सरकार ने मामले की जांच की बात कही है। विधानसभा सत्र के बाद पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस बीच केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि केदारनाथ धाम की परंपराएं प्राचीन काल से चली आ रही हैं और सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।
प्राचीन परंपरा का हिस्सा है रूप छड़ी और मुकुट
रावल ने बताया कि वीरशैव लिंगायत धर्म में पांच प्रमुख प्राचीन पीठ माने जाते हैं—रामभपुरी, उज्जैनी, केदार, श्रीशैल और काशी। इन सभी पीठों का विशेष धार्मिक महत्व है। उन्होंने कहा कि केदार पीठ ऊखीमठ वैराग्य पीठ है, जो चारों युगों से चली आ रही परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार धर्म प्रचार के लिए रावल को रूप छड़ी, मुकुट और अन्य धार्मिक सामग्री अपने साथ ले जाने का अधिकार होता है। इसी परंपरा के तहत वे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में इन प्रतीकों के साथ शामिल होते रहे हैं।
शीतकाल में ऊखीमठ में निभाई जाती है परंपरा
रावल ने बताया कि केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान के मुकुट को धारण करने की परंपरा निभाई जाती है। इसी परंपरा के तहत वे कई धार्मिक आयोजनों में रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल होते हैं।
महाराष्ट्र के नांदेड़ में धार्मिक कार्यक्रम में हुए शामिल
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में भी वे रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल हुए थे। इसी क्रम में इस वर्ष भी 5 से 12 फरवरी के बीच नांदेड़ (महाराष्ट्र) में आयोजित शिव कथा और विश्व शांति यज्ञ कार्यक्रम में वे इन धार्मिक प्रतीकों के साथ शामिल हुए थे।
सोशल मीडिया की बातें बताईं भ्रामक
रावल ने स्पष्ट किया कि फरवरी माह में रूप छड़ी की विधिवत साधना की गई थी और उसके बाद इसे नियमानुसार सुरक्षित स्थान पर जमा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर रूप छड़ी और मुकुट के गायब होने की जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
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