पूरे जनपद में हरिद्वार रेंज में सबसे अधिक 1,145 वन्यजीवों का रेस्क्यू किया गया है.
हरिद्वार: वन विभाग में वन्यजीवों के रेस्क्यू का आंकड़ा इस साल 2200 के पार पहुंच गया है. वन विभाग के 1 जनवरी से 24 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार जिले की अलग अलग वन रेंजों में कुल 2,221 वन्यजीवों का रेस्क्यू किया गया. इनमें सबसे अधिक संख्या सांपों की रही.
हरिद्वार में कोबरा, वाइपर, धामन और अजगर के साथ ही मगरमच्छ और गुलदार जैसे खतरनाक वन्यजीवों को भी रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा गया. बीते मंगलवार रात को भी हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र से एक विशालकाय मगरमच्छ का रेस्क्यू किया गया. यह मगरमच्छ आबादी में घुस आया था, जिसे सुरक्षित रेस्क्यू कर गंगा नदी में छोड़ा गया.
दरअसल हरिद्वार जनपद वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल से घिरा हुआ है. इसके अलावा कृषि बाहुल्य जिला होने के कारण वन्यजीव आबादी में घुस आते हैं. मानसून के दौरान तो वन्यजीवों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है. आंकड़ों के मुताबिक पूरे जनपद में हरिद्वार रेंज में सबसे अधिक 1,145 वन्यजीवों का रेस्क्यू किया गया. इसके बाद लक्सर रेंज में 359, चिड़ियापुर में 297, खानपुर में 165, रुड़की में 152 और श्यामपुर रेंज में 103 वन्यजीवों का रेस्क्यू दर्ज किया गया.
हरिद्वार वन्यजीव रेस्क्यू
रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों में 370 कोबरा सांप, 212 अजगर सांप, करीब 50 मगरमच्छ, 02 गुलदार और अन्य सांप, मॉनिटर लिजार्ड, सांभर और नीलगाय जैसे कई वन्यजीवों को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया गया. मानसून के बाद भी आबादी वाले क्षेत्रों में सांपों और अन्य वन्यजीवों के निकलने की घटनाएं बढ़ने के कारण वन विभाग की टीमों को लगातार सूचना मिल रही है. इसको लेकर वन विभाग की टीमें अलर्ट हैं. कुल मिलाकर 2221 वन्यजीवों को आबादी से पकड़कर उनके वास स्थल यानी जंगल में उनके घर भेजा गया.
सीमित संसाधनों में भी जारी है अभियान: वनकर्मियों के पास सीमित संसाधन हैं फिर भी इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा गया. मानसून से पहले वनकर्मियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई थी. साथ ही अलग से क्यूआरटी टीम का गठन किया गया. जिनका मुख्य फोकस केवल आबादी में घुस वन्यजीवों को रेस्क्यू करने पर रहा.
रेंज अधिकारी शीशपाल सिंह ने बताया पूरे जनपद में 2221वन्यजीवों को रेस्क्यू किया गया है. इनमें अजगर, कोबरा, मगरमच्छ, गुलदार और अन्य कई वन्यजीव शामिल हैं. वन विभाग की टीमें वन्यजीवों के रेस्क्यू का काम लगातार कर रही हैं. मानसून शुरू होने से पहले रेस्क्यू टीमों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, ताकि आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने वाले वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके.
सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर वन्यजीव को रेस्क्यू करती हैं. नियमानुसार उसे सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा जाता है. उन्होंने बताया अभी भी वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में निकलने का सिलसिला जारी है. लोगों से अपील की जा रही है कि घर या आसपास किसी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे पकड़ने या परेशान करने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें.
Post Views: 3
Post navigation
my uttarakhand news Bureau Dehradun, 21 Oct: Chief Secretary Anand Bardhan on Wednesday emphasised the…
my uttarakhand news Bureau Dehradun, 21 Oct: Art India Academy of Performing Arts, Dehradun observed…
नई दिल्ली; हिमालय ऊपर से शांत दिखता है. पहाड़ हरे-भरे हैं. नदियां बह रही हैं.…
my uttarakhand news Bureau Dehradun, 21 Oct: As in previous years, REACH (Rural Entrepreneurship for…
The TonsBridge School celebrates 14th Founders’ Day with “Dharohar – The Legacy of Ancient India”…
CM pays tribute to Martyrs on Police Commemoration Day my uttarakhand news Bureau Dehradun, 21…