1
1
1
2
3
वर्ष 2015 में उधम सिंह नगर जनपद के बाजपुर में सामने आए चर्चित मजदूर पप्पू हत्याकांड में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद अहम निर्णय सुनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी मलखान सिंह को आरोपों से मुक्त कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा, इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।
यह मामला लगभग एक दशक से न्यायिक प्रक्रिया में था। अभियोजन के अनुसार, पप्पू की हत्या अवैध संबंधों के चलते की गई थी। आरोप था कि पत्नी और हकीमगंज, स्वार (रामपुर, उत्तर प्रदेश) निवासी मलखान सिंह ने मिलकर बिजली के तार से गला घोंटकर हत्या को अंजाम दिया।
प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब गणेश घाट, स्वार, रामपुर निवासी मनोज कुमार ने थाना बाजपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया था कि उनका बड़ा भाई पप्पू पिछले चार वर्षों से बाजपुर में रहकर मजदूरी कर रहा था। शिकायत में यह भी कहा गया कि पप्पू और उसकी पत्नी के बीच कथित संबंधों को लेकर विवाद होते रहते थे।
22 अप्रैल 2015 की रात पप्पू का शव बाजपुर थाना क्षेत्र के एक खेत में मिला था। पुलिस जांच के दौरान पत्नी से पूछताछ की गई, जिसमें कथित तौर पर हत्या में संलिप्तता स्वीकार करने की बात सामने आई थी। पुलिस का यह भी कहना था कि घटना के समय पप्पू नशे में था।
हालांकि, न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता विक्रमजीत सिंह और आरडी मजूमदार ने दलील दी कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य ठोस और विश्वसनीय नहीं हैं। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है, जो वर्षों तक सुर्खियों में रहा था।