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उत्तराखंड में जंगलों में लगी आग को बुझाने में आड़े आ रहे सांप! जानिए क्या है माजरा – Uttarakhand

Snakes are coming in the way of extinguishing the forest fire in Uttarakhand! Know what is the matterइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)देहरादून: उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए फायर सीजन से पहले NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के निर्देश पर वृहद मॉक ड्रिल की गई थी. इस मॉक ड्रिल में अब तक सरकार की तैयारी को भांपने का प्रयास किया गया. खास बात यह है कि इसके बाद कुछ ऐसे सुझाव सामने आए हैं, जिनके लिए वन विभाग में प्रयास शुरू कर दिए हैं. इन्हीं सुझाव के आधार पर वन विभाग न केवल ग्रामीणों को भी उपकरण उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है, बल्कि आग को बुझाने के लिए विभाग में छोटे वाहनों की भी जरूरत महसूस की गई है.दरअसल, उत्तराखंड में हर साल फॉरेस्ट फायर सीजन 15 फरवरी से 15 जून तक माना जाता है. बता दें कि फायर सीजन में जंगलों में आग लगने की कई घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती है. ऐसी ही घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने इस बार कुछ नई पहल की है. सबसे पहला प्रयास तो यहीं है कि जंगल में आग लगने के बाद तुरंत रिस्पांस किया जाए और जीतना जल्दी हो सके आग पर काबू पाया जाए. इसी के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न जरूरत को पूरा किया जा रहा है और इसका में जो भी प्रयास होने चाहिए उन्हें समय से पूरा करने की कोशिश हो रही है.सांप से काटे जाने का डर: नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के निर्देशन में हुए मॉक ड्रिल के बाद कुछ ऐसे सुझाव आए हैं, जिन्हें वन विभाग गंभीरता से पूरा करने में जुट गया है. दरअसल विभिन्न तैयारी के बीच कुछ जरूरी बातें भी सामने आई हैं, जिनमें जंगलों में आग बुझाने के दौरान सांप से काटे जाने की आशंका शामिल है. ऐसे में सुझाव दिया गया है कि वन क्षेत्र में एंटी वेनम की व्यवस्था की जाए, ताकि जंगल में आग बुझाने के दौरान सांप के काटने पर फौरन संबंधित व्यक्ति को इलाज मिल सके.छोटी गाड़ियों की जरूरत हुई महसूस: इसी तरह जागरूकता कार्यक्रमों को और भी ज्यादा बढ़ाने के लिए कहा गया है. ताकि लोगों को ही पता रहे की गर्मी के समय उन्हें किसी भी तरह से ऐसा काम नहीं करना है जिससे जंगलों में आग लगे. इन्हीं सुझावों में एक सुझाव यह भी है कि आग बुझाने के दौरान कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बड़ी गाड़ी नहीं पहुंच पाती. ऐसे में वहां पर इस तरह के फायर टेंडर उपलब्ध कराया जाए, जो जंगलों की पतली सड़कों पर चल सकें.समय-समय पर मॉक ड्रील की जरूरत: इसमें सबसे महत्वपूर्ण सुझाव वन क्षेत्र के आसपास के गांव वालों को भी उपकरण देने से जुड़ा है. जिसके बाद वन विभाग इस पर विचार करने में जुट गया है. उत्तराखंड वन विभाग में अब ये भी निर्णय लिया है कि राज्य भर में समय-समय पर फायर ड्रिल करवाई जाएगी. ताकि वन विभाग को अपनी तैयारी का पता रहे और फायर ड्रिल के दौरान आने वाली दिक्कतों को भी समय रहते समाप्त किया जा सके.इस दौरान वन विभाग डिमांड के अनुसार उपकरणों की भी खरीद कर रहा है, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वनाग्नि को नियंत्रित करने के लिए सबसे आधुनिक उपकरण खरीदे जा रहे हैं. साथ ही उत्तराखंड के जंगलों की स्थिति को देखते हुए उपकरणों का चयन भी किया जा रहा है.

Nandni sharma

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