

…then there wouldn’t have been so much destruction; this one system could have reduced the devastation in Dharaliइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)धराली | वर्ल्ड बैंक वित्त पोषित परियोजना उत्तराखंड मल्टी हजार्ड अर्ली वार्निंग सायरन सिस्टम पर राज्य में ठीक से काम हुआ होता तो पांच अगस्त को उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल में आपदा की तबाही के स्तर को कम किया जा सकता था। परियोजना के तहत उत्तराखंड में आपदा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों मे अर्ली वार्निंग सायरन सिस्टम लगाया जाना है, इसके लिए 250 स्थान चिहिन्त किए गए थे, लेकिन वर्ष 2023 से अब तक मात्र 175 ही लग पाए।खास बात यह है कि उत्तरकाशी में भी 14 स्थानों पर यह सिस्टम स्थापित किया गया है,लेकिन इसमें धराली गांव शामिल नहीं था। उत्तराखंड में मल्टी हजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने के लिए वर्ल्ड बैंक की ओर से 118 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह सिस्टम किसी भी आपदा की पूर्व चेतावनी सायरन के माध्यम से देता है। इसमें संवेदनशील स्थानों पर टावर पर यह Xसिस्टम लगाया जाएगा।इसके बाद भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और सेंटर वाटर कमीशन जैसी संस्थाओं से प्राप्त होने वाले अलर्ट को सायरन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाता है। इसमें बाढ़,भूस्खलन,भूकंप,अतिवृष्टि,हिमस्खलन जैसी घटनाओं के वक्त लोगों को सायरन के माध्यम से सचेत कर दिया जाता है, ताकि वह सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें।यह सिस्टम अलग-अलग आपदाओं में अलग-अलग प्रकार की ध्वनियां प्रसारित करता। ताकि लोगों को पता चल सके कि वह किस खतरे में हैं। यह प्रणाली केरला ने अपनाई है,जहां यह सिस्टम सफलता पूर्वक काम कर रहा है। इससे आपदा में नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।कहां कितने सिस्टम➤उत्तरकाशी – 14➤टिहरी गढ़वाल – 14➤देहरादून – 15➤पौड़ी गढ़वाल – 15➤हरिद्वार – 08➤चमोली – 14➤रुद्रप्रयाग – 09➤अल्मोड़ा – 11➤बागेश्वर – 09➤चम्पावत – 10➤नैनीताल – 09➤पिथौरागढ़ – 14➤यूएस नगर – 08(इसके अलावा 25 सिस्टम जिलों में डीएम ऑफिस, एसएसपी कार्यालयों और अन्य स्थानों पर लगे हैं।)तीन स्तरों से कंट्रोल होता है सायरन सिस्टमकिसी भी आपदा की Xस्थिति में तीन स्तरों से सायरन सिस्टम को ऑपरेट किया जाता है। पहला जहां सायरन सिस्टम लगा होता है, वहां एक मिनी कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाता है। दूसरा जिला स्तर पर बने कंट्रोल रूम से भी इसे ट्रिगर (बटन दबाना) किया जाता है। तीसरा राज्य स्तर पर बने कंट्रोल रूम से भी सायरन सिस्टम को एक्टीवेट किया जा सकता है।विनोद कुमार सुमन,सचिव आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि शुरुआती चरण में 250 स्थानों पर सायरन सिस्टम इंस्टाल किया जाना है, इनमें से 175 स्थानों पर इसे स्थापित कर दिया गया है। उत्तरकाशी के हर्षिल में भी यह सिस्टम लगा है। वहां आपदा की स्थिति में सिस्टम ने काम किया या नहीं,इसका भी परीक्षण कराया जा रहा है।सड़क बंद,फसलें मंडी तक पहुंचाना मुश्किलउत्तरकाशी की हर्षिल घाटी में गंगोत्री हाईवे जगह-जगह बाधित होने के कारण काश्तकारों को नगदी फसलों को मंडियों तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। यहां गंगोत्री हाईवे सोनगाड़, डबराणी, हर्षिल तथा झाला में बंद पड़ा है। हर्षिल घाटी स्थित सुक्की, झाला, जसपुर, पुराली, धराली, हर्षिल, बगोरी, मुखबा गांव में इन दिनों फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली, कद्दू आदि नगदी फसलें खेतों में तैयार है। लेकिन स्थानीय काश्तकारों के पास इन फसलों को मंडी तक ले जाने का कोई रास्ता नहीं है। धराली गांव की ममता पंवार ने बताया कि पिछले साल तक हमारी फसलें समय पर मंडी पहुंच जाती थीं।
