उत्तराखंड में बिना लाइसेंस के कुटटू के खुले आटे की बिक्री पर रोक, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई – Uttarakhand

Sale of open buckwheat flour without license banned in Uttarakhand, strict action will be taken on violationSale of open buckwheat flour without license banned in Uttarakhand, strict action will be taken on violationSale of open buckwheat flour without license banned in Uttarakhand, strict action will be taken on violationइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)देहरादूनः मिलावटी कुट्टू के आटे से बने पकवान खाने से देहरादून में करीब 300 लोगों के बीमार होने के बाद बुधवार को उत्तराखंड सरकार ने सख्त नियम बनाया है। जिसमें बिना लाइसेंस के कुटटू के खुले आटे की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। साथ ही उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।“अब कुट्टू के आटे की बिक्री केवल सीलबंद पैक में होगी”स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि अब कुट्टू के आटे की बिक्री केवल सीलबंद पैक में होगी और अगर कोई खाद्य कारोबारी कुटटू का खुला आटा बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी । कुमार ने बताया कि खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कुट्टू के आटे की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावटी एवं संदूषित आटे के कारण होने वाली बीमारियों की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मिलावटी कुटटू के आटे से बने पकवान खाने के बाद सोमवार को करीब 300 लोग खाद्य विषाक्तता के शिकार हो गए थे। कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देश पर राज्य में कुट्टू के आटे की बिक्री को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।सचिव कुमार ने कहा कि अब कोई भी खाद्य कारोबारी कुट्टू का खुला आटा नहीं बेच सकेगा और इसकी बिक्री केवल सीलबंद पैकेटों में ही की जाएगी। उनके अनुसार इसके अलावा, पैकेट पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के अनुसार लेबलिंग नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि पैकेट पर कुट्टू के आटे की पिसाई की तिथि, पैकेजिंग की तिथि और ‘एक्सपायरी डेट (उपयोग की समय सीमा)’ स्पष्ट रूप से अंकित करना जरूरी होगा। इसके अतिरिक्त, हर पैकेट पर विक्रेता की खाद्य लाइसेंस संख्या भी दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में देहरादून, हरिद्वार और अन्य जिलों में मिलावटी कुट्टू के आटे के सेवन से लोगों के खाद्य विषाक्तता से पीड़ित होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है जिसके मद्देनजर सरकार ने सख्ती बरतने का फैसला किया है।

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