

उत्तराखंड में ड्रोन कैमरों से अवैध खनन पर निगरानी
उत्तराखंड में अपराध और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए धामी सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। अब राज्य में नदियों की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी और खनन सामग्री ढोने वाले वाहनों में जीपीएस युक्त चिप लगाई जाएगी, जिससे उनकी आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा सके। रात में अवैध खनन रोकने के लिए देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों में नाइट विजन ड्रोन कैमरे लगाए गए हैं। इन तकनीकों की मदद से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वाहन केवल स्वीकृत पट्टों से ही खनिज सामग्री उठाएं और वैध रवन्ने के साथ ही चलें। औद्योगिक विकास (खनन) विभाग के अनुसार, राज्य ने पिछले वर्ष 1050 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था और इस वर्ष लक्ष्य 950 करोड़ रुपये रखा गया है। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल अपराध और अवैध खनन पर लगाम लगाना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और राजस्व वृद्धि को भी सुनिश्चित करना है।
उत्तराखंड में खनन पर जीपीएस और ड्रोन से होगी निगरानी
उत्तराखंड में बरसात के बाद शुरू होने वाले दूसरे चरण के खनन कार्य को पारदर्शी बनाने और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। विभाग ने राज्यभर में 25 स्थानों पर चेकगेट स्थापित किए हैं, जिन पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि वहां से गुजरने वाले वाहनों की सामग्री पर निगरानी रखी जा सके। इसके साथ ही वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगाया गया है जिससे उनकी वास्तविक आवाजाही का रिकॉर्ड रखा जा सके। निदेशक खनन राजपाल लेघा ने बताया कि खनन व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए नाइट विजन ड्रोन कैमरों के उपयोग की भी तैयारी की जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में पानी भराव के कारण फिलहाल खनन गतिविधियों की शुरुआत में देरी हो रही है, लेकिन विभाग आधुनिक तकनीक की मदद से खनन कार्यों को पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)
