Site icon My Uttarakhand News
Subscribe for notification

हरिद्वार के मनसा देवी में बारिश होने पर पैदल नो-एंट्री, हादसे के बाद बने सख्त नियम

हरिद्वार: मनसा देवी मंदिर हादसे के बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के इंतजाम और कड़े कर दिए हैं। अब 10 एमएम बारिश दर्ज होते ही श्रद्धालुओं की मंदिर तक पैदल एंट्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इस दौरान केवल रोपवे का संचालन जारी रहेगा। भीड़ और फिसलन से बचाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने साफ किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, चाहे इसके लिए अस्थायी असुविधा क्यों न उठानी पड़े।
हाल ही में मंदिर परिसर में मची भगदड़ में नौ लोगों की मौत और 37 श्रद्धालु घायल हो गए थे। इसके बाद से ही प्रशासन लगातार सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों ने माना कि बारिश के दौरान सीढ़ियों और मार्ग पर अत्यधिक फिसलन हो जाती है और भीड़ का दबाव बढ़ने से हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
इसलिए तय किया गया है कि बारिश के समय मार्ग पूरी तरह बंद रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, मौसम विभाग से रियल टाइम अपडेट लिया जाएगा। बारिश शुरू होते ही मुख्य मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मी और होमगार्ड श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने से रोक देंगे। इस दौरान जो श्रद्धालु दर्शन करना चाहेंगे, वे केवल रोपवे का ही इस्तेमाल कर सकेंगे।
इधर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और मौके पर तैनात पुलिस बल का सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी देर की असुविधा के बजाय दुर्घटनाओं को रोकना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मंदिर प्रबंधन के साथ मिलकर स्थायी समाधान पर भी विचार किया जाएगा।
पैदल मार्ग की हालत जस की तसमनसा देवी जाने वाले पैदल मार्ग पर हादसे के बाद भी सुधार कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सड़क न तो समतल की गई और न ही किनारे की घनी झाड़ियां काटी गईं। हादसे के दौरान मार्ग की अव्यवस्था ने श्रद्धालुओं को परेशान किया था, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने सबक नहीं लिया। इधर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर शासन की ओर से राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क को पत्र भेजा गया है।
फिर आ सकता है मलबाविशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पैदल मार्ग की सुरक्षा को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। पहाड़ी से आए दिन पत्थर और मलबा गिरने का खतरा बना रहता है। हादसे के समय भी इसी मलबे ने हालात को और बिगाड़ा था। स्थानीय लोग बताते हैं कि बरसात के दिनों में यह खतरा और बढ़ जाता है।
चंडी देवी मंदिर पर भी नजरप्रशासन ने बताया कि अभी यह व्यवस्था मनसा देवी मंदिर के लिए लागू की गई है। चंडी देवी मंदिर में भीड़ और रास्तों की स्थिति को देखते हुए यही व्यवस्था वहां भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। दोनों मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। हादसों की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बना है।
नहीं मिला मुआवजामनसा देवी हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों और घायलों को अब तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। हादसे के बाद मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन की ओर से मुआवजे का आश्वासन दिया गया था, लेकिन हकीकत में पीड़ित परिवार आज भी मदद के इंतजार में हैं।

Exit mobile version